आसनसोल में 200 महिलाओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग, केरल से आई टीम ने सिखाए कलरीपयट्टू के गुर

विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी और जिलाधिकारी एस. पोन्नंबलम की मौजूदगी में प्रशिक्षण शिविर का समापन, हर छह महीने में ट्रेनिंग कराने की योजना

आसनसोल। महिलाओं को आत्मरक्षा में सक्षम बनाने के लिए आसनसोल में शुरू की गई पहल अब व्यापक अभियान का रूप लेगी। दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में आत्मरक्षा के गुर सीखने वाली करीब 200 महिलाएं अब दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगी। केरल से आए प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को वहां की पारंपरिक युद्धकला कलरीपयट्टू के साथ आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। शिविर के समापन पर आयोजकों ने हर छह महीने में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और अगले पांच वर्षों में आसनसोल शहर की 10 हजार तथा पूरे पश्चिम बर्दवान जिले की 10 हजार महिलाओं को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा।
प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी, जिलाधिकारी एस. पोन्नंबलम, भाजपा जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य, उद्योगपति एवं समाजसेवी पवन गुटगुटिया और भाजपा नेता अपूर्व हजरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए तैयार करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसलिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। हर छह महीने पर शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि इस पहल की शुरुआत आसनसोल गर्ल्स कॉलेज से हुई है। इसके अलावा बीसी कॉलेज और शहर के कई महिला विद्यालयों में भी प्रशिक्षण की व्यवस्था शुरू की गई है। पहले बैच की करीब 200 प्रशिक्षित महिलाओं के माध्यम से अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। ये महिलाएं अपनी सहेलियों, रिश्तेदारों और पड़ोस में रहने वाली अन्य महिलाओं को आत्मरक्षा के तरीके सिखाएंगी। विधायक के अनुसार, प्रशिक्षित महिलाओं के नियमित अभ्यास के लिए इसी स्टेडियम में सप्ताह में दो दिन व्यवस्था करने की योजना है। इससे महिलाएं प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों का अभ्यास जारी रख सकेंगी और दूसरी महिलाओं को सिखाने के लिए भी तैयार होंगी। आयोजकों ने अगले पांच वर्षों में आसनसोल शहर की 10 हजार और पूरे पश्चिम बर्दवान जिले की 10 हजार महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रशिक्षित महिलाओं को अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा, “महिला जहां शक्तिशाली होगी, वहां समाज शक्तिशाली होगा, राज्य शक्तिशाली होगा और देश शक्तिशाली होगा।” उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना समय की जरूरत है। पढ़ाई, ट्यूशन, नौकरी या अन्य कार्यों से घर लौटते समय आत्मरक्षा का ज्ञान उनके आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करना है। भाजपा जिला अध्यक्ष देवतनु भट्टाचार्य ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से केरल के प्रशिक्षकों की टीम को आसनसोल बुलाकर कलरीपयट्टू का प्रशिक्षण दिलाया गया। उन्होंने कलरीपयट्टू को लगभग साढ़े चार हजार वर्ष पुरानी पारंपरिक युद्धकला बताते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से आसनसोल की महिलाओं को एक विशिष्ट युद्धकला सीखने का अवसर मिला। दस दिनों के प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कलरीपयट्टू में शारीरिक संतुलन, फुर्ती, अनुशासन और विभिन्न रक्षात्मक तकनीकों के अभ्यास पर जोर दिया जाता है। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से महिलाओं में अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ दैनिक गतिविधियां कर सकेंगी।.शिविर के समापन के साथ ही अब प्रशिक्षित महिलाओं के जरिए इस अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी है। आयोजकों की योजना है कि नियमित प्रशिक्षण और अभ्यास के माध्यम से आत्मरक्षा की जानकारी घर-घर तक पहुंचाई जाए, ताकि महिलाएं स्वयं सक्षम बनने के साथ दूसरी महिलाओं को भी जागरूक और प्रशिक्षित कर सकें।

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