
कोलकाता, 11 फरवरी । नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ, कोलकाता ने झाड़ग्राम जिले की सुबर्णरेखा नदी में कथित अवैध बालू खनन के मामले में संयुक्त समिति का गठन किया है। यह आदेश रंधीर घोष बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं अन्य की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
पीठ में न्यायिक सदस्य माननीय न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह शामिल थे। सुनवाई नौ फरवरी 2026 को हुई।
प्राधिकरण ने बुधवार को अपने बयान में कहा कि आवेदन राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 14, 15 और 18 के तहत दायर किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अवैध, अवैज्ञानिक और लापरवाह तरीके से बालू खनन हो रही है।
आवेदक का कहना है कि खनन कार्य बिना अनिवार्य पर्यावरणीय स्वीकृति (ईसी), स्थापना की सहमति (सीटीई) और संचालन की सहमति (सीटीओ) के किया जा रहा है।
मामले में उठाए गए तथ्यों को पर्यावरण से जुड़ा गंभीर प्रश्न मानते हुए ट्रिब्यूनल ने तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है। इसमें शामिल हैं :
क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय)पश्चिम बंगाल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
जिलाधिकारी, झाड़ग्राम समिति को दो सप्ताह के भीतर बैठक कर स्थान निरीक्षण करने, आवेदक और परियोजना पक्ष को साथ लेकर तथ्यात्मक स्थिति की जांच करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम सुझाने का निर्देश दिया गया है। समिति को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।झाड़ग्राम के जिलाधिकारी को समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि नदी तल से बालू खनन केवल तभी किया जा सकता है, जब राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना एवं संचालन की सहमति प्राप्त हो।
साथ ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, झाड़ग्राम को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि क्षेत्र में कोई अवैध खनन न हो।मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च को निर्धारित की गई है।
