
कोलकाता, 11 फरवरी । पूर्व मेदिनीपुर जिले के एराफातपुर गांव में एक 14 वर्षीय किशोरी को कई डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद आईसीयू एम्बुलेंस तकनीशियन की सतर्कता से उसकी जान बच गई। सात दिन तक इलाज चलने के बाद बुधवार को उसे कांथी महकमा अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में व्यापक चर्चा है।
जानकारी के अनुसार, पारिवारिक कारणों से मानसिक तनाव में आकर किशोरी ने एक सप्ताह पहले कीटनाशक का सेवन कर लिया था। परिजन उसे इलाज के लिए कई अस्पतालों में ले गए और अंततः तमलुक स्थित एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद कांथी लौटकर एक अन्य डॉक्टर से भी उसकी मृत्यु की पुष्टि कराई गई।
घर पहुंचने के बाद धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं। लाउडस्पीकर पर मृत्यु की सूचना भी प्रसारित कर दी गई और कब्र खोदने का काम भी पूरा हो चुका था।
इसी दौरान आईसीयू एम्बुलेंस तकनीशियन रवींद्रनाथ मंडल ने किशोरी की नब्ज में हल्की धड़कन महसूस की। उनके आग्रह पर परिजन उसे एक बार फिर कांथी महकमा अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार होने लगा और सात दिनों के उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय भावुक माहौल देखने को मिला। किशोरी ने स्वयं तकनीशियन और डॉक्टरों को माला पहनाकर उनका आभार जताया।
अस्पताल अधीक्षक अरूप रतन करण ने मीडिया से कहा, “यदि हमें लिखित शिकायत मिलती है तो हम मामले की जांच करेंगे और जिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया था, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। समय पर सतर्कता और उपचार से एक बच्ची की जान बचाई जा सकी। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
