
रानीगंज। रानीगंज इलाके के बांसड़ा मे आदिवासी सामुदाय की ओर से बुधवार को भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तिलका मुर्मू (मांझी) की 277वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस दौरान बांसड़ा के पूरे आदिवासी गांव में सुबह से ही उत्सव का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग, महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत तिलका मुर्मू के छाया चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान संजय हेब्रम ने तिलका मुर्मू के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारत के प्रथम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संगठित आंदोलन चलाया। उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। वही इस मौके पर उपस्थित अन्य वक्ताओ ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य केवल जयंती मनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और महान स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को तिलका मुर्मू और बिरसा मुंडा जैसे महानायकों के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। वही इसी अवसर पर बांसड़ा आदिवासी क्षेत्र में स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा शिशु उद्यान’ का औपचारिक उद्घाटन भी किया गया। रानीगंज के पूर्व विधायक रुनु दत्ता ने फीता काटकर उद्यान का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद उपस्थित लोगों ने उद्यान का अवलोकन किया और बच्चों के लिए बनाए गए झूले, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं की सराहना की। उद्यान के उद्घाटन को लेकर पूरे इलाके में खुशी का माहौल देखा गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि अब तक बच्चों के खेलने के लिए कोई समुचित स्थान नहीं था। इस शिशु उद्यान के बनने से बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में खेलने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। वही इसकार्यक्रम में रानीगंज के पूर्व विधायक रुनु दत्ता एवं स्थानीय प्रधान संजय हेम्ब्रम के अलावा पियाली गुहा, बबिता बाउरी, कांती मुर्मू, प्रदीप बास्की सहित कई गणमान्य अतिथि एवं स्थानीय निवासी उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास को संजोकर रखना और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना समय की मांग है।

तिलका मुर्मू की जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि समारोह रहा, बल्कि आदिवासी समाज के गौरव, एकता और क्षेत्रीय विकास का प्रतीक बनकर भी सामने आया। यह दिन दो महान स्वतंत्रता सेनानियों—तिलका मुर्मू और बिरसा मुंडा—को नमन करते हुए बांसड़ा गांव के लिए एक यादगार दिन के रूप में दर्ज हो गया
