
एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष दानिश अजीज ने भाजपा नेताओं के कथित संरक्षण पर उठाए सवाल, विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
आसनसोल । पश्चिम बर्दवान जिले के बाराबनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सलानपुर ब्लॉक में कथित अवैध बालू कारोबार को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। नामोकेशिया, अपर केशिया और जीतपुर क्षेत्रों से रात के अंधेरे में बालू उठाकर विभिन्न कारखानों तक पहुंचाने तथा इस दौरान कथित तौर पर दूसरे राज्यों के चालानों का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पश्चिम बर्दवान जिलाध्यक्ष दानिश अजीज ने कथित बालू तस्करी और राजनीतिक संरक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा विधायक एवं राज्य स्तरीय नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। मामले ने उस समय राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब कथित अवैध बालू उठाव के साथ बिहार और पुरुलिया के चालानों के इस्तेमाल का आरोप सामने आया। आरोप है कि इन चालानों के माध्यम से बालू की ढुलाई को वैध दिखाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, चालानों की प्रामाणिकता, बालू के वास्तविक स्रोत और कथित परिवहन की वैधता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित दस्तावेजों और परिवहन अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में सलानपुर ब्लॉक के विभिन्न इलाकों में जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से बालू के कुछ भंडार जब्त किए गए थे।इसके बाद जब्त और लावारिस बालू के निस्तारण के लिए नीलामी की प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया था।
बताया गया है कि जिला स्तरीय बालू समिति की 7 जुलाई 2026 को हुई बैठक की कार्यवाही में जब्त और लावारिस बालू भंडारों की इलेक्ट्रॉनिक नीलामी कराने का निर्णय दर्ज था। इस प्रक्रिया में कई कंपनियों ने भाग लिया और कुछ कंपनियों को बालू उठाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। अब सवाल उठाया जा रहा है कि नीलामी के तहत आवंटित बालू के अलावा कहीं अन्य स्थानों से भी बालू का उठाव तो नहीं किया जा रहा है। आरोपों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में रात के समय बालू की ढुलाई होती है। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह जांच का विषय है कि संबंधित वाहनों के पास वैध परिवहन अनुमति थी या नहीं और उनके चालान वास्तव में उसी बालू भंडार से जुड़े थे, जहां से बालू उठाया गया।
हालांकि, नीलामी के बाद अवैध उठाव होने या फर्जी चालानों के इस्तेमाल की पुष्टि करने वाले दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। एआईएमआईएम के पश्चिम बर्दवान जिलाध्यक्ष दानिश अजीज ने कथित बालू कारोबार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दीप नामक एक युवक की कथित संलिप्तता का दावा करते हुए आरोप लगाया कि बालू के अवैध उठाव के पीछे कुछ राजनीतिक नेताओं का संरक्षण हो सकता है। दानिश अजीज का दावा है कि संबंधित युवक पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी सलानपुर प्रखंड के नदी घाटों से कथित अवैध बालू उठाव और उसकी ढुलाई से जुड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भी यह गतिविधि कथित तौर पर जारी है।उन्होंने इस मामले में भाजपा के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई। हालांकि, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित युवक और अन्य आरोपित पक्षों का विस्तृत पक्ष भी सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, आसनसोल उत्तर विधानसभा के भाजपा विधायक एवं राज्य स्तरीय नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने भाजपा नेताओं के संरक्षण में अवैध बालू कारोबार चलने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि भाजपा को बदनाम करने के उद्देश्य से इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नदी से अवैध रूप से बालू उठाने या उसकी तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। भाजपा विधायक के इस बयान के बाद मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गया है। एक ओर एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष कथित अवैध कारोबार और राजनीतिक संरक्षण की जांच की मांग से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा नेता ने आरोपों को निराधार बताते हुए अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया है।सलानपुर के नामोकेशिया, अपर केशिया और जीतपुर क्षेत्रों में कथित बालू उठाव को लेकर अब प्रशासनिक निगरानी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। पूरे मामले की वास्तविकता जानने के लिए बालू भंडारों की नीलामी से जुड़े दस्तावेज, आवंटित मात्रा, उठाव की अनुमति, परिवहन चालान और संबंधित वाहनों की आवाजाही के अभिलेखों का मिलान किया जाना जरूरी है। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट करना होगा कि जिन स्थानों से बालू उठाए जाने का आरोप है, वे नीलामी में शामिल भंडार थे या नहीं। साथ ही, यदि दूसरे राज्यों अथवा अन्य जिलों के चालानों का इस्तेमाल किया गया है, तो उनकी वैधता और बालू के वास्तविक स्रोत का सत्यापन भी आवश्यक होगा। फिलहाल, सलानपुर में कथित बालू तस्करी का मामला राजनीतिक आरोपों और जवाबी दावों के बीच है। आरोपों की पुष्टि करने वाले आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। ऐसे में प्रशासनिक जांच ही यह स्पष्ट कर सकेगी कि बालू का उठाव और परिवहन नियमों के अनुरूप हो रहा था या नहीं तथा इस मामले में किसी व्यक्ति अथवा समूह की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
