

कोलकाता । काशी से पधारे भागवताचार्य वेंकटेश मिश्रा ने कान्यकुब्ज भवन में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की दिव्य त्रिवेणी प्रवाहित कर श्रद्धालु भक्तों को भाव विभोर किया । व्यास पीठ से भागवताचार्य वेंकटेश मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्रसंगों और राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा का वर्णन कर यज्ञ की पूर्णाहुति की । द्वारकाधीश और माता रुक्मिणी के रुक्मिणी विवाह का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल आनंदित हो उठा । इस दौरान विवाह की भव्य सजीव झांकी सजाई गई, जहाँ श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाकर अक्षत वर्षा की और झूम उठे । श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की मित्रता के प्रसंग का वर्णन करते हुए व्यास जी ने कहा कि सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होता । कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने एकादश स्कंध के अंतर्गत भगवान दत्तात्रेय के चौबीस गुरुओं का वर्णन किया और भक्तों को समझाया कि संसार की हर जड़-चेतन वस्तु से कुछ न कुछ अच्छी शिक्षा ग्रहण की जा सकती है । कथा के अंतिम चरण में शुकदेव जी द्वारा कथा श्रवण के पश्चात राजा परीक्षित के मोक्ष का अलौकिक प्रसंग सुनाया, जो इस बात का प्रतीक है कि भागवत कथा कलयुग में मोक्षदायिनी है । कान्यकुब्ज सेवा ट्रस्ट के चेयरमैन, धर्मानुरागी, समाजसेवी पण्डित लक्ष्मीकांत तिवारी, कलकत्ता कान्यकुब्ज सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्रा, सचिव कुलदीप दीक्षित, महिला समिति की संरक्षक शकुन्तला तिवारी, अध्यक्ष प्रभा बाजपेयी, सचिव पूनम दीक्षित, संयोजक सुनील अवस्थी, रामलाल तिवारी, आशुतोष बाजपेई और सतीश शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत किया । कान्यकुब्ज सभा एवं महिला समिति के पदाधिकारियों सहित राज्य के मंत्री तापस राय, पूर्णिमा चक्रवर्ती, पूर्व डिप्टी मेयर मीना देवी पुरोहित, आचार्य श्रीकांत शास्त्री, डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी, शंकरलाल तिवारी, जय प्रकाश सिंह, विनय दुबे, जगमोहन बागला, गौरव शुक्ला, नवनीत पाण्डेय, दिनेश पांडे, पूर्णिमा कोठारी, मनोज पराशर, शशिकांत मिश्रा, शिव प्रताप दुबे, वीरेंद्र त्रिवेदी, उमेश बाजपेई, बच्चू पाण्डेय एवं श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया एवं सामूहिक आरती, पूर्णाहुति में शामिल हुए ।
