रानीगंज के सियारसोल राज परिवार की ऐतिहासिक रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में,प्रशासन ने किया निरीक्षण

16 जुलाई से शुरू होगा पारंपरिक रथ मेला

रानीगंज। पश्चिम बर्धमान जिला के रानीगंज स्थित सियारसोल राज परिवार की ऐतिहासिक एवं प्रशिद्ध रथयात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी इस रथयात्रा के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। आगामी 16 जुलाई से शुरू होने वाले पारंपरिक रथ मेले के मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों ने रथ, यात्रा मार्ग और मेले की व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। जिलाधिकारी के निर्देश पर आसनसोल के महकमा शासक (एसडीओ) साधन देवनाथ ने सियारसोल राज परिवार के ऐतिहासिक पीतल के रथ का निरीक्षण किया। उनके साथ सहायक एसीपी बिमान कुमार मृधा, पंजाबी मोड़ पुलिस फांड़ी के प्रभारी नजमुल हुडा, राज परिवार के सदस्य बिटल मालिया तथा अनुराधा मालिया सराफ भी मौजूद रहे। इस दौरान एसएससीए क्लब के पदाधिकारियों एवं मेला आयोजन समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर रथयात्रा की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने रथ की वर्तमान स्थिति, रथयात्रा के निर्धारित मार्ग, संभावित अवरोधों, यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सुरक्षा प्रबंधों का बारीकी से जायजा लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना से बचने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं। सियारसोल राज परिवार का विशाल पीतल का रथ इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान माना जाता है। यह रथ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रानीगंज के खनन क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और गौरव का भी प्रतीक है। कुछ वर्ष पूर्व इस ऐतिहासिक रथ का नए सिरे से निर्माण कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से वह योजना साकार नहीं हो सकी। ऐसे में इस वर्ष भी पारंपरिक रथ की मरम्मत, सफाई और विशेष पॉलिश कर उसे रथयात्रा के लिए तैयार किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार रथयात्रा के दिन सुबह नए राजबाड़ी परिसर से इस विशाल पीतल के रथ को ट्रक के माध्यम से पुराने राजबाड़ी के सामने लाया जाएगा। इसके बाद हजारों श्रद्धालु रस्सियों से खींचकर और हाथों से धक्का देकर रथ को निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ाएंगे। इस ऐतिहासिक रथयात्रा में हर वर्ष पश्चिम बर्धमान सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। प्रशासन ने बताया कि रथयात्रा और मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा यातायात को सुचारु बनाए रखने, पार्किंग की समुचित व्यवस्था, मेले में दुकानों के नियमानुसार आवंटन, अग्निशमन एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तथा भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रशासन और मेला समिति का कहना है कि शताब्दी पुरानी इस ऐतिहासिक परंपरा को सुरक्षित रखते हुए रथयात्रा एवं मेले का आयोजन पूरी श्रद्धा, सुरक्षा और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जाएगा। इसी उद्देश्य से सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

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