जामुड़िया के सिंघारन नदी पर कथित अतिक्रमण को लेकर तेज हुई बहस,मंत्री के सख्त रुख के बाद कार्रवाई की मांग

जामुड़िया। जामुड़िया की प्राचीन सिंघारन नदी पर कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद गहरा गया है। राज्य की शहरी विकास एवं नगर पालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल द्वारा अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उद्योग जगत की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। जहां स्थानीय लोगों और भाजपा नेताओं ने नदी को उसके मूल स्वरूप में लौटाने की मांग की है, वहीं उद्योग जगत ने तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच और संतुलित निर्णय की आवश्यकता बताई है। हाल ही में मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा था कि उन्हें जानकारी मिली है कि औद्योगिक क्षेत्र के कुछ कारखानों ने अपनी चहारदीवारी बनाकर सिंहारन नदी के हिस्से को अपने परिसर में शामिल कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नदी किसी व्यक्ति या उद्योग की निजी संपत्ति नहीं है और यदि जांच में किसी प्रकार का अवैध अतिक्रमण सामने आता है तो संबंधित उद्योगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर दोषियों के विरुद्ध जुर्माना, अवैध निर्माण हटाने और अन्य कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बहाल हो सके। मंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार कानून के शासन और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

स्थानीय लोगों ने कहा— केवल घोषणा नहीं, धरातल पर कार्रवाई हो

इकरा गांव निवासी एवं सिंघारन नदी संरक्षण अभियान से जुड़े अक्षय बनर्जी ने मंत्री के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि वर्षों से नदी को बचाने की मांग उठती रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि घोषणाओं के बजाय ठोस कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि एक समय लगभग 100 फीट चौड़ी रहने वाली सिंहारन नदी कई स्थानों पर सिमटकर 10 से 15 फीट तक रह गई है। उनका कहना है कि नदी किनारे हुए कथित अतिक्रमण के कारण बरसात में जल निकासी बाधित होती है, जिससे पानी श्मशान घाट तक पहुंच जाता है। इसके कारण अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भी गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

भाजपा ने भी उठाई अतिक्रमण हटाने की मांग

भाजपा नेता निरंजन सिंह ने कहा कि यदि किसी उद्योग ने नदी की भूमि पर अवैध कब्जा किया है तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उद्योगों के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से सिंघारन नदी को अतिक्रमण मुक्त कर उसके मूल स्वरूप को बहाल करने की मांग की।

उद्योग जगत ने निष्पक्ष जांच पर दिया जोर

दूसरी ओर, जामुड़िया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव महेश कुमार सावड़िया ने कहा कि वर्ष 2020 में तत्कालीन उपमंडलाधिकारी (एसडीओ) के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम ने सिंहारन नदी का विस्तृत निरीक्षण किया था। उस समय निरीक्षण में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया था, जिससे यह सिद्ध हो कि किसी उद्योग ने जानबूझकर नदी पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो प्रशासन, उद्योगों और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। उनका कहना था कि जामुड़िया एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है, जहां हजारों लोगों की आजीविका उद्योगों पर निर्भर है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखते हुए निर्णय लिया जाना आवश्यक है। सिंहारन नदी को लेकर बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता के बीच अब लोगों की नजर प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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