सुरेश चौधरी जी की पुस्तक “भ्रम और भ्रान्तियाँ” पर हुई परिचर्चा

 

कोलकाता : पश्चिमबंग हिन्दी अकादमी, सूचना एवं संस्कृति विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार के तत्वाधान में कार्यक्रम पुस्तक मित्र श्रृंखला की पंचम कड़ी के रूप में चयनित पुस्तक थी प्रसिद्ध कवि, लेखक और विचारक सुरेश चौधरी ‘इन्दु’ का शोधपरक संकलन “भ्रम और भ्रांतियाँ”।इस पुस्तक में अनेक ऐसी हिंदू परंपराओं, जिन्हें हम रूढ़िवादिता या अंधविश्वास कहकर नकार देते हैं, उनसे संबंधित वैज्ञानिक तर्कों की व्याख्या और वर्षों से प्रसारित मिथकों की  सत्यता भी आँकडों के साथ स्थापित की गई है।

 पाठकों में पुस्तकों के प्रति जिज्ञासा जागृत करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई इस श्रृंखला का संयोजन और संचालन अकादमी की सदस्य रचना सरन और शुभा चूड़ीवाल करती हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम की परिकल्पना और प्रस्तावना की थी।

 फॉर्मेट के अनुसार पहले पुस्तक के कुछ अंशों का वाचन किया जाता है फिर उनकी  समीक्षात्मक विवेचना की जाती है। रचना सरन ने सभी अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम प्रारम्भ किया। शुभा चूड़ीवाल ने विशेषज्ञों और लेखक का परिचय देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट की। अकादमी के वरिष्ठ सदस्य रावेल पुष्प ने उत्तरीय और माला प्रदान कर अतिथियों का अभिनन्दन किया। कवि आलोक चौधरी ने सुरेश चौधरी द्वारा रचित जगदम्बा स्तुति प्रस्तुत की।  डॉ. शिप्रा मिश्रा,मीतू कनोडिया और प्रणति ठाकुर ने पुस्तक के कुछ महत्वपूर्ण अंशों का पाठ किया। विशेषज्ञ के रूप में डॉ. वसुंधरा मिश्र और डॉ. शुभ्रा उपाध्याय उपस्थित थीं। डॉ वसुंधरा मिश्रा ने कहा कि  यदि हम सहस्त्र वर्षों की परंपराओं को सही तरीके से समझते, तो दृश्य भिन्न होता।संपूर्ण वांग्मय को गलत धारणाओं पर रखा गया है।पुस्तक के सभी अध्यायों पर उन्होंने समीक्षात्मक  टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की बातें लिखना एक लेखक के लिए यह चुनौती भरा कार्य है । डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि इतिहास में उतना सत्य नहीं होता जितना साहित्य में क्योंकि इतिहास लिखवाया जाता है और साहित्य स्वयं लिखा जाता है। उन्होंने इस पुस्तक को समसामयिक मुद्दों के चिंतन -अचिंतन की गंभीर नोटबुक बताया और कहा कि यह पुस्तक भारतीयता की खोज है।

लेखक सुरेश चौधरी ने अकादमी के प्रति आभार प्रकट करते हुए बताया कि इस पुस्तक को लिखने के लिए उन्होंने 7 वर्षों तक शोध तथा तथ्यों की पुनः पुष्टि की। उन्होंने पुस्तक में संकलित तथ्यों के संदर्भों के बारे में भी जानकारी दी। दर्शकों ने बहुत रुचि के साथ इस कार्यक्रम को सुना और अपनी जिज्ञासाओं को लेखक के समक्ष रखा। उनके प्रश्नों का सुरेश चौधरी ने विस्तार से जवाब दिया।

हेमंत भवन में स्थापित हिन्दीअकादमी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपस्थिति में शामिल थे- सर्वश्री डॉ.जसबीर चावला, आफ़ताब अहमद खान, राम नारायण झा, ओमप्रकाश चौबे, सीमा शर्मा,प्रदीप धानुक, सुरेंद्र सिंह, आशीष चौधरी,विनोद यादव, बिलाल खान तथा अन्य।

 कार्यक्रम के अंत में रावेल पुष्प ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते‌ हुए अकादमी के जारी तथा भावी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की घोषणा की। हिंदी अकादमी की इस अभिनव  साहित्यिक श्रृंखला को सभी साहित्य प्रेमियों की सराहना मिल रही है।

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