कन्टिन्यूएशन माइन के विरोध में बांसड़ा में ईसीएल एजेंट कार्यालय का घेराव, तीर-धनुष के साथ आदिवासी ग्रामीणों का प्रदर्शन

ग्रामीणों की चेतावनी – सात दिनों में स्पष्ट निर्णय नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

रानीगंज। रानीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत अमड़ासता ग्राम पंचायत के बांसड़ा आदिवासी गांव के ग्रामीणों ने शुक्रवार को संभावित कन्टिन्यूएशन माइन परियोजना के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण एकजुट होकर ईस्टर्न कोल्फील्डिंस लिमिटेड (ईसीएल) के बांसड़ा एजेंट कार्यालय के सामने पहुंच गए और कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने लंबे समय तक कार्यालय के सामने धरना दिया। इस दौरान कई आदिवासी ग्रामीण अपने पारंपरिक तीर-धनुष और अन्य पारंपरिक हथियारों के साथ प्रदर्शन में शामिल दिखाई दिए, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। वही घटना की सूचना मिलते ही स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रानीगंज थाना क्षेत्र के पंजाबी मोड़ फाड़ी की पुलिस मौके पर पहुंची। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। हालांकि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही और कोई हिंसक घटना नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि ईसीएल प्रबंधन उनके गांव के पास कन्टिन्यूएशन माइन शुरू करने की योजना बना रहा है, जिसका वे कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यह खदान शुरू हुई तो पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और आसपास रहने वाले लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। बांसड़ा आदिवासी गांव के एक निवासी ने बताया कि यदि उनके इलाके में यह माइन शुरू होती है तो पूरे क्षेत्र में धुआं और धूल का प्रभाव बढ़ जाएगा, जिससे लोगों को सांस लेने तक में दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ग्रामीण कई बार ईसीएल प्रबंधन को अपनी आपत्ति से अवगत करा चुके हैं और मांग कर चुके हैं कि यदि खदान शुरू करनी ही है तो उसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी ग्राम सभा के माध्यम से ईसीएल के बांसड़ा एजेंट को इस मामले की जानकारी दी गई थी। उस समय प्रबंधन की ओर से कहा गया था कि इस विषय को उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है। लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह कन्टिन्यूएशन माइन उनके क्षेत्र में शुरू होगी या नहीं। शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने ईसीएल अधिकारियों के साथ बैठक कर अपनी मांगों को दोहराया। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अपने क्षेत्र और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर वे किसी भी हालत में इस माइन को शुरू नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर ईसीएल प्रबंधन इस मामले में लिखित रूप से कोई स्पष्ट निर्णय नहीं देता है, तो वे और बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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