
रेल-मेट्रो सेवाओं, लोकतांत्रिक अधिकारों और दलित-आदिवासी मुद्दों पर केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
रानीगंज। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने रानीगंज के गिरजा पाड़ा स्थित पार्टी के जिला कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार की कार्यशैली, विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित प्रतिबंधों और यातायात सेवाओं को बाधित किए जाने के मुद्दे पर सवाल उठाए। साथ ही, उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में दूसरे दलों के नाम और पहचान के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई। हालांकि, संवाददाता सम्मेलन में उनके भाषण का प्रमुख केंद्र सरकार की नीतियों और विरोध की आवाज को दबाने के आरोप रहे। मोहम्मद सलीम ने कहा कि माकपा और वामपंथी दल लंबे समय से दमनकारी नीतियों का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में पार्टी के नारे, ‘जोर कितना दमन में है तेरे, देख लिया है, देखेंगे’ का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी तरह का दमन लोगों की आवाज को हमेशा के लिए दबा नहीं सकता। उनके अनुसार, नई पीढ़ी भी अपने अधिकारों और विचारों को लेकर सवाल उठा रही है तथा विरोध के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बाधित करने जैसी कार्रवाइयों से आम नागरिकों को परेशानी होती है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार की जिम्मेदारी देश की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाना है या परिवहन सेवाओं को बंद करना। सलीम ने कहा कि रेल, मेट्रो और बस जैसी सार्वजनिक सेवाएं आम लोगों की सुविधा के लिए हैं। यदि इन सेवाओं को रोक दिया जाता है या यात्रियों को रास्ते में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, तो इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। माकपा नेता ने अपने वक्तव्य में विरोध प्रदर्शन और बंद के मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जब वामपंथी दल आंदोलन करते हैं, तब उन पर देश की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन, उनके अनुसार, जब सरकार की नीतियों या प्रशासनिक फैसलों के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है, तब भी आम जनता को ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार का दायित्व परिवहन व्यवस्था का विस्तार और संचालन करना है या उसे बाधित करना। मोहम्मद सलीम ने अपने भाषण में जर्मनी में हिटलर के शासनकाल से लेकर भारत में आपातकाल तक का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि दमन और उत्पीड़न के सहारे जनमत को लंबे समय तक दबाकर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान भी नागरिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन अंततः जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपना जवाब दिया था। उन्होंने संकेत दिया कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध के लिए जगह होना जरूरी है। उनके अनुसार, सरकार को आलोचनात्मक आवाजों को दबाने के बजाय जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नागरिकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जानी चाहिए। संवाददाता सम्मेलन में सलीम ने कोलकाता में माकपा के राज्य मुख्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट के आसपास आयोजित एक भाजपा-समर्थित कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलों का इस्तेमाल दूसरी राजनीतिक शक्तियां अपने हितों के लिए करती हैं। इस संदर्भ में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के आठवले गुट का नाम लिया और सवाल किया कि दलितों तथा आदिवासियों के खिलाफ कथित अत्याचारों के मामलों में ऐसे दलों की भूमिका कहां दिखाई देती है। उन्होंने हाथरस में दलित युवती के साथ हुई घटना, आदिवासी महिलाओं के खिलाफ अपराधों और अन्य हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए संबंधित राजनीतिक शक्तियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। सलीम ने आरोप लगाया कि सामाजिक न्याय और वंचित समुदायों के अधिकारों की बात करने वाले कुछ दल चुनिंदा राजनीतिक परिस्थितियों में ही सक्रिय दिखाई देते हैं। ये आरोप उनके राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा थे।
भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न नामों और प्रतीकों के माध्यम से राजनीतिक गतिविधियां चलाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने इस प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए कहा कि जनता को राजनीतिक दलों की वास्तविक भूमिका और उनके कार्यों के आधार पर उनका मूल्यांकन करना चाहिए। माकपा के राज्य मुख्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट का उल्लेख करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि इस स्थान की पहचान वामपंथी राजनीति और माकपा के संगठनात्मक इतिहास से जुड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यालय के आसपास होने वाली राजनीतिक गतिविधियां भी इस स्थान के महत्व को रेखांकित करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि दूसरे राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में भी अलीमुद्दीन स्ट्रीट का संदर्भ लिया जा रहा है, तो इससे इस स्थान की राजनीतिक अहमियत का पता चलता है। संवाददाता सम्मेलन के दौरान सलीम ने केंद्र सरकार की नीतियों और भाजपा की राजनीतिक गतिविधियों की आलोचना करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों, सार्वजनिक सुविधाओं और सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनके वक्तव्य से स्पष्ट रहा कि माकपा राज्य में अपने राजनीतिक विरोध को तेज करने के साथ-साथ केंद्र सरकार की कार्यशैली को जनता के बीच मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, संवाददाता सम्मेलन में लगाए गए आरोपों पर भाजपा या संबंधित दलों का पक्ष इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं हो सका।
