
श्रीमद्भागवत महापुराण समस्त ग्रंथों का मुकुटमणि ।
हावड़ा । भागवताचार्य त्रिभुवनपुरी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ में श्रीकृष्ण – उद्धव संवाद, श्रीकृष्ण – सुदामा मित्रता, शुकदेव जी का प्रस्थान एवं विविध प्रसंग सुन कर श्रद्धालु भक्त भाव – विभोर हो गये । राधे, राधे, जयकारे से गूंज रहे कथा स्थल में पूर्णाहुति के अवसर पर सांवरिया सत्संग परिवार, श्री श्याम परिवार (हावड़ा) सुखी संसार के भक्त सपरिवार शामिल हुए । स्वामी त्रिभुवनपुरी महाराज ने कहा भागवत का अर्थ है भगवान से जुड़ा हुआ मार्ग । महापुराण श्रीमद्भागवत कथा चार वेदों, उपनिषदों का सार तथा साक्षात अमृत के समान है ।

श्रद्धालु भक्तों को संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने की प्रेरणा देते हुए कहा जिस प्रकार सभी आभूषणों में मुकुट और उस मुकुट में भी मणि श्रेष्ठ है, उसी प्रकार सनातन हिन्दू धर्म में सभी कथाओं, पुराणों और धार्मिक, आध्यात्मिक ग्रंथों में श्रीमद्भागवत महापुराण को समस्त ग्रंथों का मुकुटमणि, सर्वश्रेष्ठ एवं परम शिरोमणि माना गया है । कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा । कलियुग में जीवन के सभी पापों से मुक्ति का एक मात्र आधार भगवान की भक्ति है । भगवान का नाम स्मरण करने से ही भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है । ईश्वर किसी से भूखे पेट रहकर भक्ति करने को नहीं कहते हैं । मन पर नियंत्रण और नाम जाप ही इस जगत में पार लगाने के लिए काफी है ।

राज्य के मंत्री उमेश राय, समाजसेवी विजय उपाध्याय, विश्वनाथ गौरीसरिया, पंचानंद ओझा, राजेन्द्र खरकिया, कामाख्या नारायण सिंह, दीपक गुप्ता, राजेश डालमिया, दिलीप कानोड़िया, ललित गुप्ता, अनूप तोदी, धीरेन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, संदीप पोद्दार, उमाशंकर ओझा, विजय सिंह, अनिल जालान, लाल बहादुर पाठक एवं श्रद्धालु भक्तों ने व्यास पीठ का पूजन किया ।
