
जामुड़िया। ईसीएल के केंदा क्षेत्र अंतर्गत बहुला पियर जामबाद स्थित बंद ओपन कास्ट परियोजना (ओसीपी) में डीवीसी दुर्लभपुर की फ्लाई ऐश (राख) से भराई किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि राख से लदे वाहनों के लगातार आवागमन के कारण सड़क पर धूल की मोटी परत जम रही है और हवा में उड़ने वाली राख से आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रानीगंज के पंजाबी मोड़ से चिचुड़िया मोड़ तक सड़क पर दिनभर धूल उड़ती रहती है। इससे सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। उड़ती राख आंखों में चली जाने से वाहन चलाने में कठिनाई होती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। कुछ दिन पूर्व इसी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने राख से लदे वाहनों को रोककर विरोध-प्रदर्शन भी किया था। स्थानीय निवासी मंजू बाउरी और सुशांत बाउरी ने आरोप लगाया कि राख परिवहन से न केवल सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, बल्कि पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि हवा में उड़ने वाली राख के कारण लोगों में आंख, श्वसन और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। साथ ही, राख के महीन कण आसपास के कुओं में पहुंच रहे हैं, जिससे पेयजल भी दूषित हो रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि दूषित पानी के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि भारी वाहनों के लगातार परिचालन से सड़कें तेजी से टूट रही हैं, लेकिन उनकी मरम्मत की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि ईसीएल प्रबंधन बंद खदानों की भराई के नाम पर स्थानीय लोगों की समस्याओं और श्रमिक परिवारों के हितों की अनदेखी कर रहा है। इस संबंध में ईसीएल केंदा क्षेत्र के महाप्रबंधक अक्षय चंद्र दे ने कहा कि बंद ओसीपी की वैज्ञानिक भराई के लिए डीवीसी को कार्यादेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि राख परिवहन या भराई कार्य से स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की परेशानी हो रही है, तो पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
