श्रीकृष्ण – रुक्मणी विवाह से प्रेरणा लेकर आदर्श सामाजिक जीवन जीने की प्रेरणा ।

राधा आद्य शक्ति का स्वरूप है ।— पण्डित विजय शंकर मेहता

कोलकाता। अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान यज्ञ में व्यास पीठ से पंडित विजय शंकर मेहता ने श्रीकृष्ण – रुक्मणी विवाह के संदर्भ में सरल आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा राधा के 2 स्वरूप हैं, पहला रुक्मणी के रूप में, दूसरा राधा के रूप में । राधा आद्य शक्ति का स्वरूप है । सनातन हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण ने धर्म एवं भक्तों की रक्षा के लिये अवतार लिया । पण्डित मेहता ने कहा वर्तमान समय में विवाह इवेंट – उत्सव का रूप ले रहा है । उन्होंने श्रीराम – सीता, श्रीकृष्ण – रुक्मणी विवाह से प्रेरणा लेकर आदर्श सामाजिक जीवन जीने की प्रेरणा दी । पण्डित मेहता ने कहा गृहस्थ जीवन में घर – परिवार में नारी का माता, पत्नी के रूप में आदर्श रूप है । सनातन हिन्दू धर्म का सिद्धान्त है मातृ देवो भव । लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा की आद्य शक्ति के रूप में मान्यता है । पण्डित मेहता ने देवी – कुलदेवियों के प्रति आस्था रखते हुए गृहस्थ जीवन में बच्चों को अच्छे संस्कारों से संस्कारित करने की प्रेरणा दी । उन्होंने आद्य शंकराचार्य एवं मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ के संदर्भ में कहा मंडन मिश्र की पत्नी भारती ने भी अपनी विद्वता से शंकराचार्य से शास्त्रार्थ किया । पति – पत्नी एक – दूसरे के मनोविज्ञान को समझे, तभी गृहस्थ जीवन में सुख – शान्ति होगी । संतान का सुखी जीवन माता – पिता के जीवन की मुस्कान है । सम्पूर्ण परिसर में देवी भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला । राज्य के मंत्री दिलीप घोष, अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के ट्रस्टी के के सिंघानिया, सुशील झुनझुनवाला, हरीश काबरा, सुभाष बालासरिया, अनिल झुनझुनवाला ने व्यास पीठ का पूजन किया ।

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