अयोध्या में बने कारसेवकों का शहीद स्मारक : पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ
कोलकाता, 26 जुलाई।उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान शहीद हुए रामकुमार कोठारी के जन्मदिन के मौके पर राम शरद कोठारी स्मृति संघ के बैनर तले शनिवार की शाम
‘सशक्त हिंदू-समर्थ पश्चिम बंग’ विषयक सार्थक संगोष्ठी में विचार रखते हुए पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने मांग की कि जलियांवाला बाग की तर्ज पर अयोध्या में भी शहीद स्मारक बनना चाहिए, जिसमें सभी कारसेवकों के नाम अंकित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज उनकी इच्छा पूर्ण हुई जब कोठारी बंधुओं के परिवार से वे मिलें और शहीद भाइयों को श्रद्धांजलि दी। दोनों भाई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि कोठारी बंधुओं के आदर्शों और बलिदान को पूरे भारतवर्ष में बताया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी इनके बलिदान को याद रख सके। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि पूरा विश्व हमें भगवान राम और चाणक्य के कारण जानता है। हमें दो किलो चावल और मुफ्त बिजली के कारण अपने मताधिकार को नहीं बेचना है। उन्होंने सवाल उछाला कि आज राम-शरद, सावरकर, सुभाष, खुदीराम और विवेकानंद जैसी विभूतियां क्यों नहीं जन्म लेती ? इसका मुख्य कारण है हमारी चेतनाएं दम तोड़ रही है।
उन्होंने आगे कहा कि जाति चौखट के अंदर, घर से बाहर सनातनी बनकर निकले। ऐसा करने से आप अपने और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रख पाएंगे। चापलूसों का महिमामंडन करने से बहादुरों का जन्म नहीं होता। भारत आदिकाल से धर्म प्रधान देश रहा है। आपको स्वार्थ, संगठन और पार्टी से ऊपर उठकर ऐसे सत्य ढूंढने चाहिए, जिससे सनातन का सम्मान बढ़े।
अपने संबोधन में धर्म और पंथ को परिभाषित करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि कर्म ही धर्म है अर्थात धर्म वह है जो धारण किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय संविधान में सब बराबर है तो फिर केवल मंदिर का पैसा ही सरकार के खाते में क्यों जमा होता है गुरुद्वारे, गिरजाघर और मस्जिद का क्यों नहीं ? भारत के 84 करोड़ हिंदुओं को संविधान में 8वां दर्जा क्यों दिया गया है।
उन्होंने उपस्थित लोगों से निवेदन किया कि बहुत थोड़ा समय अपने जीवन का सनातन के सम्मान के लिए दें ताकि आने वाली पीढ़ी अपने वास्तविक इतिहास से साक्षात्कार कर सके और अपने बहादुर पूर्वजों से परिचित हो सके। गोष्ठी में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े मानिद सनातनी व राष्ट्रप्रेमी उपस्थित थे।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अजय नंदी ने बताया कि आज यह कार्यक्रम हम इसलिए कर पा रहें हैं, क्योंकि हजारों कारसेवकों ने भव्य राममंदिर के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया, जिसमें राम और शरद कोठारी अग्रणी थे। उन दोनों भाइयों में अदम्य उत्साह था, जिससे वे दोनों अमर हो गए। प्रधान अतिथि के रूप में उद्योगपति व समाजसेवी अंशुल चमड़िया एवं विशिष्ट अतिथि कोठारी बंधुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी उपस्थित थीं। अतिथियों को अंगवस्त्र और राम दरबार का स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संघ की गतिविधियों पर प्रकाश डाला रजत चतुर्वेदी ने और संगोष्ठी का संचालन किया संजय मंडल ने। कार्यक्रम को सल बनाने में संस्था के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
