
कोलकाता, 10 फ़रवरी । आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक तैयारियों को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसी बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने चुनावी ड्यूटी से जुड़े पुलिस अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग की प्रक्रिया 15 फरवरी तक हर हाल में पूरी करने का निर्देश दिया है।
इस संबंध में राज्य के गृह विभाग को औपचारिक पत्र भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन पुलिस पदों पर अब तक तबादले की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही, प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रीय चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजना अनिवार्य होगा।
मंगलवार को ही राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल दिल्ली में राष्ट्रीय चुनाव आयोग के फुल बेंच के साथ बैठक करने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पश्चिम बंगाल में एक ही चरण में चुनाव कराने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। सीईओ कार्यालय पहले ही आयोग को एक चरण में मतदान कराने का प्रस्ताव दे चुका है।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामले की सुनवाई की समयसीमा सात दिन और बढ़ा दी है। इसके चलते अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
राज्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय का मानना है कि अब 28 फरवरी से पहले अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन संभव नहीं हो पाएगा।
इससे पहले, सात फरवरी तक सुनवाई पूरी न होने के कारण सीईओ ने सात दिन की मोहलत मांगी थी। उस समय आयोग ने 14 फरवरी तक सुनवाई पूरी कर 21 फरवरी को अंतिम सूची जारी करने का निर्णय लिया था। लेकिन अब सुनवाई की अवधि और बढ़ने से चुनावी कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में तय समयसीमा में चुनाव कराने के लिए एक से अधिक चरणों में मतदान कराना पड़ सकता है।
इन परिस्थितियों में मनोज अग्रवाल का दिल्ली दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच चुनावी जिम्मेदारियों से जुड़े पुलिस अधिकारियों के तबादले को लेकर सख्ती दिखाते हुए सीईओ कार्यालय ने गृह सचिव को पत्र भेजकर प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न करने के निर्देश दिए हैं। पत्र राज्य के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से भेजा गया है।
चुनाव से पहले प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
