बीएलओ के लापता होने को लेकर बंगाल पुलिस ने चुनाव आयोग को सौंपी रिपोर्ट, गुमशुदगी का एसआईआर के दबाव से कोई संबंध नही

बैंक से लिया था 50 लाख का लोन

कोलकाता, 27 दिसंबर । पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले के कटवा विधानसभा क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी अमित कुमार मंडल वे पिछले चार दिनों से लापता हैं। उनके परिवार ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने जिला पुलिस से इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। अब उनके लापता होने को लेकर बंगाल पुलिस ने चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। पुलिस ने साफ किया है कि उनका लापता होना मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के काम के दबाव की वजह से नहीं है।

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक अमित कुमार मंडल ने एक बैंक से करीब 50 लाख रुपये का कर्ज लिया था। इस रकम को उन्होंने शेयर बाजार में निवेश किया, लेकिन भारी नुकसान होने के कारण वे कर्ज के बोझ में दब गए थे। पुलिस का मानना है कि इसी आर्थिक संकट के चलते वे घर से निकलकर लापता हुए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमित कुमार मंडल पेशे से शिक्षक हैं और केतुग्राम के उद्धारणपुर प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं। वे कटवा एक ब्लॉक के खजुरडिही पंचायत के बिकिहाट इलाके के रहने वाले हैं।

परिवार के अनुसार, 23 दिसंबर की सुबह करीब 10 बजे अमित बाजार से घर लौटे थे। उन्होंने मोटरसाइकिल खड़ी की और कहा कि उन्हें बीएलओ से जुड़ी एक बैठक में जाना है। इसके बाद वे घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। देर शाम तक कोई संपर्क न होने पर परिवार को चिंता हुई।

खोजबीन के दौरान उनका मोबाइल फोन, बीएलओ पहचान पत्र और एसआईआर से जुड़े कागजात घर पर ही मिले। रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश के बावजूद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो उसी रात कटवा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

परिजनों ने पुलिस को यह भी बताया कि बीएलओ की जिम्मेदारी संभालने के बाद से अमित मानसिक तनाव में थे। हालांकि, पुलिस की जांच में सामने आया है कि असली वजह आर्थिक संकट और कर्ज का दबाव था।

बताया गया है कि बूथ नंबर 23 में कुल 641 मतदाता हैं और अमित कुमार मंडल ने 33 मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए थे। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के दावे और आपत्तियों की सुनवाई शनिवार से शुरू हो चुकी है, जिसमें बीएलओ की मौजूदगी अनिवार्य होती है।

अमित के लापता होने से प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, यदि तय समय तक वे नहीं मिलते हैं, तो उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी।

 

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