कोलकाता, 23 जून । राज्य में पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद से लगातार लग रहे भेदभाव और अदालत के आदेश के अनुपालन में विफलता के आरोपों के बीच पहली बार राज्य चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला आया है। राज्य के संवेदनशील इलाकों को चिन्हित करने को लेकर मानवाधिकार आयोग ने एक पत्र दीया था। इसमें लिखा गया था कि मानवाधिकार आयोग के विशेष पर्यवेक्षक जो डीजी रैंक के अधिकारी होते हैं, वह पश्चिम बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करेंगे। चुनावी हिंसा को आधार बनाकर लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से यह पत्र दिया गया था। इसी के खिलाफ चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाई कोर्ट में अपील की थी। शुक्रवार को न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने मानवाधिकार आयोग के नोटिस को खारिज कर दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य में चुनाव की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती हो रही है। सब कुछ नियमानुसार जब हो रहा है तो मानवाधिकार आयोग को इसमें कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। अगर कहीं लगेगा कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा तो दोबारा याचिका लगाने का विकल्प मौजूद रहेगा।
