
कोलकाता। साहित्य और संस्कृति की राजधानी कही जाने वाली कोलकाता नगरी में यूं तो संस्थाओं की कमी नहीं है जो नियमित कार्यक्रम करवाती रहती हैं, इसके अलावा कुछ ऐसे साहित्य प्रेमी भी रहे हैं जो अपने आवास पर इस तरह के आयोजन चुनिंदा साहित्यकारों को लेकर किया करते थे। इधर हाल के वर्षों में रचनाकार के संस्थापक सुरेश चौधरी अपने आवास पर ऐसे आयोजन करते रहते हैं।अब महज कुछ वर्षों में कोलकाता आकर बसने वाली उर्वशी श्रीवास्तव ने अपने पिता सुरेंद्र श्रीवास्तव तथा माता उर्मिला श्रीवास्तव की स्मृति में सुर्मिल काव्य तरंग की स्थापना की और मकर संक्रांति के पवित्र पर्व पर हाइलैंड पार्क सोसाइटी के एफिल टावर के अपने सुसज्जित फ्लैट में एक अंतरंग अनौपचारिक काव्य गोष्ठी आयोजित की। इस गोष्ठी में जहां एक ओर कविताएं,गीत, गजलों का दौर चल रहा था,वहीं सुस्वादु व्यंजनों का भी सभी लुत्फ़ उठा रहे थे।
उर्वशी श्रीवास्तव ने सबसे पहले अपने बचपन से लेकर अब तक के साहित्यिक सफर पर चर्चा की और फिर काव्य की रसधार में सभी ने मकर स्नान किया, जिसमें शामिल रहे- सर्वश्री प्रमोद शाह नफ़ीस, सुरेश चौधरी, विमला पोद्दार,रावेल पुष्प, मृदुला कोठारी, वसुंधरा मिश्रा,रचना सरन,नन्दलाल सेठ, जय कुमार रुसवा,आलोक चौधरी, प्रदीप धानुक,परवेज़ अख्तर, अयाज़ खान, सैयद इरफान शेर,कमल पुरोहित अपरिचित, रणजीत भारती,विजय इस्सर,गौतम श्राफ,मोनिका सिखवाल,बिशन सिखवाल, शारदा चौधरी, सुचेतना,अतुल कुमार,आरूष श्रीवास्तव तथा अन्य।इस तरह के अंतरंग आयोजन ने मकर संक्रान्ति को यादगार बना दिया।
