
जामुड़िया। जामुड़िया के चुरुलिया स्थित राज्य सरकार की तारा ओपनकास्ट कोयला खदान में शनिवार को भाजपा के स्थानीय नेताओं और समर्थकों ने विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए खदान में खनन कार्य और कोयले का परिवहन प्रभावित रहा। भाजपा समर्थकों ने खदान परिसर में पार्टी का झंडा लेकर प्रदर्शन किया और स्थानीय स्तर पर रोजगार में कथित भेदभाव का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खदान में स्थानीय स्तर पर काम देने के मामले में सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि भाजपा समर्थकों और उनके परिवारों को काम के अवसरों से वंचित किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान भाजपा समर्थकों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की। इस दौरान स्थानीय विधायक के खिलाफ भी नारे लगाए जाने की बात सामने आई है। बताया जाता है कि चुरुलिया स्थित तारा ओपनकास्ट खदान राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण कोयला स्रोतों में से एक है। कंपनी सूत्रों के अनुसार, यहां से प्रतिदिन औसतन दो से तीन वैगन कोयला राज्य के विभिन्न ताप विद्युत केंद्रों तक भेजा जाता है। इनमें संतालडीह, बक्रेश्वर तथा बजबज-टीटागढ़ सहित राज्य के कई विद्युत संयंत्र शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लंबे समय से होती रही है कि जब राज्य सरकार की अपनी खदान से बिजली संयंत्रों के लिए कोयले की आपूर्ति की जा रही है, तब खदान के संचालन और कोयले के निर्बाध परिवहन को लेकर प्रशासन तथा संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है। शनिवार को हुए प्रदर्शन के बाद इसी मुद्दे को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि खदान में काम के वितरण को लेकर पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। उनका आरोप है कि राजनीतिक पहचान के आधार पर काम देने की व्यवस्था समाप्त कर स्थानीय लोगों को समान अवसर दिया जाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि स्थानीय लोगों को काम देने में किसी प्रकार का पक्षपात किया जाता है तो वे इसके खिलाफ आंदोलन जारी रखेंगे। प्रदर्शन के कारण खदान के भीतर खनन और कोयला परिवहन की गतिविधियां कुछ समय के लिए प्रभावित हुईं। स्थिति की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों को सुना तथा स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया। इसके बाद खदान परिसर में स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आने लगी। गौरतलब है कि जामुड़िया क्षेत्र में कोयला खदानों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां पहले भी सामने आती रही हैं। सत्ता में किसी भी दल के रहने के दौरान खदानों में राजनीतिक दलों के झंडे और समर्थकों के प्रदर्शन को लेकर समय-समय पर विवाद होता रहा है। स्थानीय लोगों का एक वर्ग जहां राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप का विरोध करता है, वहीं विभिन्न दलों के समर्थक रोजगार और स्थानीय अधिकारों को लेकर अपनी मांगें उठाते रहे हैं।
शनिवार के प्रदर्शन ने एक बार फिर खदानों के संचालन में राजनीतिक हस्तक्षेप, स्थानीय रोजगार और कोयला आपूर्ति की निरंतरता को लेकर चर्चा तेज कर दी है। यदि खदान में खनन अथवा कोयला परिवहन का काम बार-बार बाधित होता है, तो इसका असर राज्य के ताप विद्युत संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति पर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, वर्तमान स्थिति में पांचों विद्युत संयंत्रों की कोयला आपूर्ति पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ेगा, यह संबंधित विभाग और खदान प्रबंधन की आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फिलहाल पुलिस और कंपनी प्रबंधन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है और खदान में कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से कब शुरू होता है, इस पर स्थानीय लोगों तथा खदान से जुड़े कर्मचारियों की नजर बनी हुई है।
