ईसीएल के बनजेमीहारी ओसीपी में भारी ब्लास्टिंग के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, दो घंटे तक ठप रहा उत्पादन और कोयला परिवहन

आसनसोल। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के बनजेमीहारी ओपन कास्ट परियोजना (ओसीपी) में हो रही लगातार भारी ब्लास्टिंग के विरोध में शुक्रवार को स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें पड़ने और क्षेत्र में कंपन की समस्या का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में ग्रामीण खदान परिसर पहुंच गए और कोयला उत्पादन तथा परिवहन कार्य रोककर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण लगभग दो घंटे तक खदान में उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह प्रभावित रही। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान में प्रतिदिन होने वाली तेज ब्लास्टिंग से पूरा इलाका थर्रा उठता है। कंपन इतना अधिक होता है कि लोगों को भूकंप जैसा एहसास होता है। इसके कारण आसपास के कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं और लोगों में हमेशा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासी साधु शरण महतो ने बताया कि ब्लास्टिंग के समय घरों में तेज कंपन महसूस होता है, जिससे लोग भयभीत होकर अपने घरों से बाहर निकल आते हैं। उन्होंने कहा कि कई मकानों में पहले ही दरारें पड़ चुकी हैं और इस संबंध में कई बार ईसीएल प्रबंधन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वहीं ग्रामीण सचिन भुइयां ने कहा कि हाल ही में खदान के समीप भूमि धंसने (सबसाइडेंस) की घटना भी सामने आई है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में किसी मकान को नुकसान पहुंचता है या कोई जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाएंगे, तब तक वे खदान में सामान्य कामकाज नहीं होने देंगे।ग्रामीणों के प्रदर्शन के चलते खदान में कोयला उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप हो गया। सूचना मिलने पर ईसीएल के बनजेमीहारी कोलियरी के एजेंट राजीव कुमार सिन्हा मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण भी किया। राजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि जिस स्थान पर भूमि धंसने की घटना हुई है, उसकी पहचान कर ली गई है। सबसे पहले उस हिस्से की फिलिंग (भराई) कराई जाएगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे। इसके बाद पूरे माइनिंग क्षेत्र का तकनीकी अध्ययन कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।उन्होंने कहा कि खदान में ब्लास्टिंग खनन महानिदेशालय (डीजीएमएस) के निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप की जाती है और विस्फोट स्थल से लगभग 200 से 250 मीटर की दूरी के नियमों का पालन किया जाता है। इसके बावजूद ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ब्लास्टिंग के दौरान उत्पन्न कंपन की तीव्रता मापने के लिए वाइब्रोमीटर लगाया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि आवश्यक हुआ तो ब्लास्टिंग प्रक्रिया में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। ईसीएल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा उपायों और तकनीकी जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और खदान में उत्पादन एवं परिवहन कार्य दोबारा शुरू हो सका। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ब्लास्टिंग के प्रभाव को नियंत्रित करने और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *