सनातनी योद्धा सम्मान से विशिष्ट समाजसेवी सम्मानित ।

ईश्वर के प्रति आस्था, भक्ति सनातन धर्म का कर्तव्य — स्वामी विशोकानंद भारती ।

कोलकाता । निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर, राजगुरु बीकानेर स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने सत्संग भवन में डाक्टर लक्ष्मीकांत पाठक, समाजसेवी सत्यनारायण भट्टड़, आलोक दम्मानी, सत्यनारायण बाहेती, अशोक झा, मुकेश व्यास, राजेन्द्र कुमार सोनी, डॉ. आर एस मिश्रा को सनातनी योद्धा सम्मान से सम्मानित किया । श्री श्री जगन्नाथ मंदिर एवं गुरुकुल गौशाला, कल्याणी के ट्रस्टी डॉ. अशोक पोद्दार ने निर्माणाधीन सेवा प्रकल्पों की जानकारी देते हुए सहयोग करने का निवेदन किया ।

स्वामी विशोकानंद भारती ने अपने प्रवचन में कहा गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कहते हैं आत्मा शाश्वत (सनातन), सर्वव्यापी, अचल और स्थिर है, जिसका न कभी जन्म होता है और न कभी अंत । भौतिक शरीर नष्ट होता है, लेकिन आत्मा अमर है । सनातन धर्म का अर्थ है आत्मा का शाश्वत और स्वाभाविक कर्तव्य । गीता में शाश्वत सत्य, निष्काम कर्म, ज्ञान और ईश्वर के प्रति आस्था, भक्ति को सनातन धर्म में कर्तव्य माना गया है । सत्संग भवन के ट्रस्टी पण्डित लक्ष्मीकांत तिवारी, दीपक मिश्रा ने श्रद्धालु भक्तों से गुरु गीता प्रवचन का लाभ लेने का निवेदन किया । स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद, संजय ब्रह्मचारी, पण्डित जय प्रकाश पाण्डेय, राजू शर्मा, अभय पाण्डेय एवं श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे । संयोजक राजेन्द्र कुमार सोनी ने संचालन करते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया ।

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