सीएपीएफ सुरक्षा को लेकर हुमायूं कबीर की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट का इनकार, गृह मंत्रालय से संपर्क की सलाह

 

कोलकाता, 19 जनवरी । कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक और नवगठित जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) से ‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा की मांग की थी।

न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की एकल पीठ ने हुमायूं कबीर को सलाह दी कि वह इस संबंध में सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) से संपर्क करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को किस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जानी है, इसका निर्णय लेने का अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है, इसलिए इस मामले में वही सक्षम प्राधिकारी है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि सुरक्षा कवर का निर्धारण संबंधित व्यक्ति को प्राप्त खतरे के आकलन के आधार पर किया जाता है और इस प्रक्रिया में अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है।

हुमायूं कबीर, जो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, ने अपनी याचिका में दावा किया था कि राज्य सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने में विफल रही है, जबकि उन्हें जान का खतरा है।

गौरतलब है कि हुमायूं कबीर को अतीत में कई बार तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर फटकार लग चुकी है। बाद में बाबरी मस्जिद को लेकर दिए गए एक विवादास्पद बयान के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया और गैर-भाजपा व गैर-तृणमूल राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन की संभावना जताई। हालांकि, अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने उनके साथ गठबंधन की घोषणा नहीं की है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *