
कोलकाता, 21 नवम्बर । आगामी 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और वीवीपैट इकाइयों की जांच के दौरान पंजीकृत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपस्थित रहने का आमंत्रण देने का फैसला चुनाव आयोग ने किया है। यह प्रक्रिया जनवरी से शुरू होगी।
आयोग के अनुसार इस कदम का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को मजबूत करना है। बीते वर्षों में विपक्षी दलों की ओर से मतदान के दिन मशीनों में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे, जिनमें यह कहा गया था कि किसी उम्मीदवार के पक्ष में बटन दबाने पर वोट किसी अन्य उम्मीदवार को चला जाता था। आयोग इन सभी आरोपों को कई बार वैज्ञानिक आधार पर खारिज कर चुका है।
आगामी चुनावों के लिए ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की आवश्यकता पिछली बार की तुलना में काफी अधिक होगी क्योंकि 2024 लोकसभा और 2021 विधानसभा चुनावों की तुलना में मतदान केंद्रों की संख्या में करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अधिकारियों के अनुसार बूथों की संख्या के आधार पर और उसके ऊपर 30 प्रतिशत आरक्षित मशीनें रखकर कुल आवश्यकता का आकलन किया जाता है। इस गणना के अनुसार करीब 1.30 लाख ईवीएम और लगभग उतनी ही वीवीपैट मशीनों की जरूरत होगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयोग के निर्देश के अनुसार इस बार किसी भी बूथ पर मतदाताओं की संख्या 1,200 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसी कारण नए बूथों की संख्या बढ़ानी पड़ी, जिसके चलते मशीनों की मांग में भी वृद्धि हुई है।
