
मंगलपुर में 152 कट्ठे में फैले जलस्रोत को लेकर विवाद गहराया, ग्रामीणों ने पैमाइश और सीमांकन की मांग की
रानीगंज। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मंगलपुर इलाके स्थित मंगलपुर मौजा में करीब 152 कट्ठे में फैले ऐतिहासिक माला तालाब को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने तालाब के एक बड़े हिस्से में मिट्टी डालकर भराई करने और उसके आसपास पक्की चहारदीवारी बनाए जाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि तालाब के करीब 22 कट्ठे हिस्से को अब तक भर दिया गया है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है और उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंगलपुर का माला तालाब ब्रिटिश शासनकाल और राजबाड़ी के समय से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से यह तालाब इलाके के महत्वपूर्ण जलस्रोतों में शामिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस तालाब का उपयोग आसपास के लोग विभिन्न जरूरतों के लिए करते रहे हैं। ऐसे में तालाब के स्वरूप में कथित बदलाव को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से तालाब के एक हिस्से में मिट्टी डालकर उसे भरने का काम किया गया। इसके बाद संबंधित हिस्से के आसपास पक्की चहारदीवारी का निर्माण किए जाने की बात भी कही जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, धीरे-धीरे तालाब के हिस्से को भरने की प्रक्रिया जारी रही तो आने वाले समय में पूरे जलस्रोत के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक करीब 22 कट्ठे हिस्से को मिट्टी डालकर भरा जा चुका है। हालांकि, तालाब की जमीन का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है और कितने हिस्से में भराई हुई है, यह प्रशासनिक पैमाइश और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकारी भूमि रिकॉर्ड में तालाब की जमीन आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडीए) के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब के आसपास की जमीन को लीज पर दिए जाने के बाद उसी की आड़ में तालाब के हिस्से को भी भरने का प्रयास किया गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब से संबंधित भूमि अभिलेखों की जांच की जाए और मौके पर जाकर जमीन की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए। उनका कहना है कि रिकॉर्ड में तालाब के रूप में दर्ज जमीन का स्वरूप किसी भी परिस्थिति में मनमाने तरीके से बदला नहीं जाना चाहिए। मामले को लेकर स्थानीय निवासी दिनेश महतो ने रानीगंज के भूमि एवं भूमि सुधार कार्यालय (BLRO) सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में तालाब की तत्काल पैमाइश कराने और जमीन का सीमांकन करने की मांग की गई है। दिनेश महतो का कहना है कि यदि समय रहते तालाब की जमीन की पैमाइश और सीमांकन नहीं कराया गया तो धीरे-धीरे इसके अन्य हिस्सों पर भी अतिक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मौके की जांच कर तालाब की वास्तविक सीमा को चिह्नित करने और कथित भराई की जांच कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों ने तालाब की जमीन के कथित भूमि-स्वरूप परिवर्तन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जलस्रोत के रूप में दर्ज जमीन का उपयोग बदलने अथवा उसके स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन करने से पहले संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब की जमीन वास्तव में सरकारी रिकॉर्ड में जलस्रोत के रूप में दर्ज है, तो उसके संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की भी है। इसलिए प्रशासन को केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय राजस्व रिकॉर्ड, भूमि का नक्शा और मौके की स्थिति की संयुक्त जांच करनी चाहिए। मामले में शिकायत सामने आने के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाह प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। ग्रामीणों की मांग है कि BLRO और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर तालाब की पैमाइश और सीमांकन कराएं। साथ ही, तालाब के किस हिस्से में भराई हुई है और वहां निर्माण कार्य किस आधार पर किया गया है, इसकी भी जांच की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि माला तालाब केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि क्षेत्र की पुरानी पहचान और महत्वपूर्ण जलस्रोतों में से एक है। यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में इसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
फिलहाल तालाब की जमीन पर कथित भराई और निर्माण को लेकर दोनों स्तरों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। जमीन के राजस्व अभिलेख, नक्शे, सीमांकन और मौके की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तालाब की कितनी जमीन प्रभावित हुई है और निर्माण कार्य वैध है या नहीं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर ऐतिहासिक माला तालाब को संरक्षित करने की मांग की है।
