प्रधान के पति पर पंचायत चलाने का आरोप, रूपनारायणपुर पंचायत कार्यलय में ‘महिलाओं का जोरदार प्रदर्शन

आसनसोल। आसनसोल के बाराबनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रूपनारायणपुर ग्राम पंचायत में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने पंचायत में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार तथा ‘प्रॉक्सी प्रधान’ के आरोपों को लेकर पंचायत कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी उग्र हो गई कि आक्रोशित महिलाओं ने पंचायत प्रधान के पति बिपन दास को कार्यालय से बाहर निकाल दिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि ग्राम पंचायत की निर्वाचित प्रधान अपर्णा दास हैं, लेकिन पंचायत का अधिकांश प्रशासनिक एवं विकास संबंधी कार्य उनके पति बिपन दास द्वारा संचालित किया जाता है। उनका कहना है कि पंचायत से जुड़े अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय भी वही लेते हैं, जबकि निर्वाचित प्रधान की भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई है। महिलाओं ने इसे पंचायती व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के विपरीत बताया।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने पंचायत में विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद तथा सरकारी भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण जैसे गंभीर आरोप लगाए। उनका आरोप था कि कई मामलों में बिना समुचित जांच के अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पंचायत से जुड़ी कई वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उनका यह भी आरोप था कि लंबे समय से शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
हंगामे की सूचना मिलते ही रूपनारायणपुर पुलिस फाड़ी की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि पंचायत के सरकारी कार्यों में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा पंचायत कार्यालय में नियमों के अनुरूप ही कार्य होगा। पुलिस के आश्वासन के बाद महिलाओं ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और स्थिति सामान्य हो गई। हालांकि, महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की अब तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, संबंधित पक्ष की ओर से भी इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस घटना के बाद पूरे रूपनारायणपुर क्षेत्र में पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो पंचायत की कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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