संत – महात्मा चलते फिरते तीर्थ हैं — जगतगुरू स्वामी परमात्मानंद महाराज ।

कोलकाता । जगतगुरू स्वामी परमात्मानंद गिरी महाराज ने ब्रह्ममयी काली मन्दिर, नोआपाड़ा पधारने पर स्वामी अनन्त बोध चैतन्य महाराज का स्वागत किया । स्वामी अनन्त बोध चैतन्य महाराज एवं पोद्दार सेवा ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. अशोक पोद्दार ने स्वामी परमात्मानंद महाराज को सनातनी योद्धा सम्मान से सम्मानित किया । स्वामी परमात्मानंद महाराज ने बंगभूमि में देवी काली – देवी दुर्गा की रामकृष्ण परमहंस, मां शारदा, स्वामी विवेकानंद, बंकिम चंद्र चटर्जी एवं श्रद्धालु भक्तों द्वारा साधना – आराधना पर कहा भारतीय अध्यात्म – संस्कृति में संत – महात्मा चलते फिरते तीर्थ हैं । वसुधैव कुटुम्बकम् एवं सर्वधर्म सद्भावना भारतीय धर्म – संस्कृति है ।

स्वामी अनन्त बोध चैतन्य महाराज ने कहा संत – महात्मा सत्य, करुणा और समभाव से परिपूर्ण होता है, वह लोभ-लालच से परे, निष्काम भाव से श्रद्धालु भक्तों का मार्गदर्शन करता है । उनका आचरण धर्म शास्त्रों के अनुकूल होता है, वे कभी किसी की बुराई नहीं करते और उनके मन में सभी जीवों के लिए समान प्रेम होता है । उनके स्वभाव में अहंकार नहीं होता । उनका जीवन सादगीपूर्ण और निष्कपट होता है । वे हमेशा मधुर, सत्य और संयमित बोलते हैं। ।

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