राशन डीलरों, वितरक, थोक विक्रेताओं की समस्याओं का केन्द्र एवं राज्य सरकार शीघ्र समाधान करे ।

भारत में करोड़ों नागरिकों को खाद्यान्न आपूर्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा — प्रदीप सरकार ।

कोलकाता । सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली (राशन) में डिस्ट्रीब्यूटर, थोक विक्रेता एवं राशन डीलर को वर्तमान में हो रही असुविधाओं, उनकी समस्याओं की ओर केन्द्र एवं राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप सरकार ने हैंडलिंग नुकसान (लॉस) एवं कमीशन को बढ़ाने का निवेदन किया है । पश्चिम बंगाल में सन 2014 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद लम्बे समय तक थोक विक्रेताओं, वितरकों को हैंडलिंग लॉस नहीं मिला, लेकिन विक्रेताओं ने खाद्यान्न वितरण का कार्य जारी रखा । क्षतिपूर्ति प्रदान करने का दायित्व केन्द्र एवं राज्य सरकार का है । उन्होंने कहा नेशनल फूड सेक्यूरिटी एक्ट के तहत भारत की जनता को राशन उपलब्ध कराने में वितरक, थोक विक्रेता, राशन डीलर को सन 2014 से पहले की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हैंडलिंग नुकसान, कमीशन निर्धारित करना चाहिये । राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के पूर्व राशन डीलर को 500 ग्राम प्रति क्विंटल हैंडलिंग नुकसान एवं वितरक, थोक विक्रेता को 330 ग्राम प्रति क्विंटल हैंडलिंग नुकसान मिलता था लेकिन अगस्त 2022 से इसे घटा कर ठोक विक्रेता, थोक विक्रेता के लिये राशन कार्ड की अलग – अलग कैटेगरी में क्रमशः 190 ग्राम एवं 226 ग्राम प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया । राशन डीलर को राशन कार्ड की सभी कैटेगरी में 200 ग्राम निर्धारित किया गया । प्रदीप सरकार ने राशन डीलरों को न्यूनतम कमीशन का भी विरोध करते हुए कहा बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमत – परिवहन व्यय, मजदूरी, गोदाम किराया, बिजली बिल में बढ़ोतरी से राशन दुकानदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है । हैंडलिंग लॉस और कमीशन की व्यापक समीक्षा कर वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप राशन वितरण प्रणाली की व्यवस्था करे ।


केन्द्र एवं राज्य सरकार जन वितरण प्रणाली (राशन) के वितरक, थोक विक्रेताओं, डीलर की समस्याओं का शीघ्र समाधान करे । उन्होंने कहा भारत में राशन की शुरुआत 1940 के बंगाल के अकाल से हुई थी । सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी डी एस) के तहत खाद्यान्न का आवंटन केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी है । केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफ सी आई) के जरिए राज्यों को थोक अनाज भेजती है, जबकि राज्य सरकार राशन कार्ड धारकों को मासिक कोटा तय करके दुकानों से वितरण संभालती है । राशन डीलर, थोक विक्रेता, वितरक की समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं करने पर भारत के करोड़ों नागरिकों को खाद्यान्न आपूर्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा ।

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