कोलकाता, 07 जुलाई । कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को प्रस्तावित रैली के लिए ममता बनर्जी को सशर्त अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रैली निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए ही निकाली जा सकेगी।
कालीघाट तृणमूल कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया था कि पुलिस बुधवार को प्रस्तावित रैली की अनुमति नहीं दे रही है। रैली का उद्देश्य आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया था, हालांकि इसे बारुईपुर की घटना के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। इस रैली में ममता बनर्जी के शामिल होने की भी घोषणा की गई थी।
पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद कालीघाट तृणमूल कांग्रेस ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। अदालत ने याचिका दायर करने की अनुमति देने के बाद सुनवाई की और अंततः निर्धारित शर्तों के साथ रैली आयोजित करने की अनुमति प्रदान कर दी।
गौरतलब है कि बारुईपुर की घटना के विरोध में सोमवार को भी ममता बनर्जी सड़क पर उतरी थीं। उन्होंने कालीघाट स्थित अपने आवास से मोमबत्ती मार्च की शुरुआत की थी। इस दौरान केंद्रीय बलों ने उनके जुलूस को रोकने का प्रयास किया, लेकिन ममता बनर्जी अपने समर्थकों के साथ बैरिकेड पार कर मुख्य सड़क तक पहुंच गई थीं। इसी दिन तृणमूल कांग्रेस की ओर से डोला सेन, प्रतिमा मंडल और बिमान बनर्जी को बारुईपुर भेजा गया था, जहां उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
हाल के समय में चुनावी पराजय और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों के बीच ममता बनर्जी पहले भी फेरीवालों के कथित निष्कासन के विरोध में सड़क पर उतर चुकी हैं। अब बुधवार को प्रस्तावित रैली के जरिए तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर जनसंपर्क और विरोध प्रदर्शन की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
