बलिदान दिवस पर याद किए गए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, रानीगंज मे भाजपा नेताओं ने उनके योगदान को किया नमन

रानीगंज। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर आज रानीगंज विधानसभा कार्यालय में एक श्रद्धांजलि सभा एवं स्मरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया। इस अवसर पर रानीगंज भाजपा मंडल-1 के अध्यक्ष शमशेर सिंह, तुषार कांति बनर्जी, राजा भौमिक, शंकर साव, रवि केसरी, मोनू वर्मा सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस दौरान भाजपा नेता शमशेर सिंह ने कहा कि 23 जून 1953 भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन हुआ था। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी देश की एकता और अखंडता के प्रबल समर्थक थे तथा जम्मू-कश्मीर में लागू अलग व्यवस्था के विरोध में उन्होंने व्यापक आंदोलन चलाया था। उनका प्रसिद्ध नारा “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” आज भी राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार और आदर्श आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक पश्चिम बंगाल के लोगों को डॉ. मुखर्जी के योगदान और उनके जीवन संघर्ष से पूरी तरह अवगत नहीं कराया गया। शमशेर सिंह ने कहा कि वर्तमान में राज्य की भाजपा सरकार ने यह संकल्प लिया है कि पश्चिम बंगाल के प्रत्येक नागरिक तक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की जानकारी पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बंगाल के विकास, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में डॉ. मुखर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी डॉ. मुखर्जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने देशहित को सर्वोपरि रखा और राष्ट्रीय एकता के लिए निरंतर संघर्ष किया। वक्ताओं ने उनके आदर्शों पर चलने तथा राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बताए मार्ग पर चलने और राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं विकास के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।

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