
जामुड़िया। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को मजबूत या पायदार एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से राज्यव्यापी प्राकृतिक खेती कार्यशाला अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को जामुड़िया कृषि विभाग की ओर से जामुड़िया के बागडीहा कम्युनिटी हॉल में एक भव्य प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग 200 से 250 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना था। कार्यशाला में बागडीहा-सिद्धपुर ग्राम सहित जामुड़िया ब्लॉक -2 के विभिन्न कृषि प्रधान क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान उपस्थित हुए।कार्यक्रम का शुभारंभ जामुड़िया के विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं ‘वंदे मातरम्’ गीत के सामूहिक गायन के साथ किया गया। इसके बाद मंचासीन अतिथियों ने उपस्थित किसानों को अंग वस्त्र दे कर सम्मानित किया और कृषि क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भोजन मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है और किसान प्रतिकूल प्राकृतिक परिस्थितियों तथा अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए देश एवं समाज के लिए निरंतर अन्न उत्पादन करते हैं। किसानों के अथक परिश्रम के कारण ही आमजन का जीवन सुचारु रूप से चल पाता है। इसलिए समाज में किसानों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक उर्वरकों के उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, रासायनिक दवाओं के दुष्प्रभाव तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सम्बंधित विशेषज्ञों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से विभिन्न तकनीकी पहलुओं को सरल भाषा में समझाया तथा किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। इस कार्यक्रम में विधायक डॉ बिजन मुख़र्जी के अलावा जामुड़िया ब्लॉक-2 कृषि विभाग के सहायक कृषि निदेशक शेख जसीमुद्दीन, जामुड़िया के बीडीओ भास्कर विश्वास, कांकसा प्रखंड के सहायक कृषि निदेशक सुप्रभात पाल, जिला उद्यान पालन अधिकारी मिलन बेसरा, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि पलाश अंकुर तथा विश्वभारती विश्वविद्यालय, बीरभूम के पादप रोग विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. भोलनाथ मंडल उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष रमेश घोष एवं कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे। कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों ने बताया कि कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक और उपयोगी रहा। उन्होंने कहा कि अब तक वे मुख्य रूप से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर थे, लेकिन इस कार्यशाला से प्राप्त जानकारी के बाद वे भविष्य में जैविक एवं प्राकृतिक पद्धति से खेती करने की दिशा में गंभीरता से कार्य करेंगे। किसानों का मानना है कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत कम करेगी, बल्कि भूमि की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वही इस अवसर पर विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी ने कहा कि कार्यशाला को किसानों का अभूतपूर्व समर्थन मिला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में क्षेत्र के अधिकाधिक किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा तथा पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने इस प्रकार की उपयोगी कार्यशालाओं के आयोजन की सराहना की तथा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की मांग की। आयोजन समिति ने किसानों के सहयोग और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त करते हुए प्राकृतिक कृषि को जन-आंदोलन का रूप देने का संकल्प दोहराया।
