सेना और प्रधानमंत्री के प्रति जंतर-मंतर पर काक्रोचों के दुर्व्यवहारों से दुखी पं.आर्यगिरि ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र

विदेश संचालित काक्रोचों को दंड देने एवं हिंदू एकता केलिए अंतरजातीय विवाहों को प्रचुर सरकारी प्रोत्साहन की की मांग

जामुड़िया। जामुड़िया के निंगा स्थित प्रसिद्ध निंगेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी एवं साहित्यकार कवि पंडित आर्य प्रहलाद गिरि ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हमारे सुरक्षाकर्मी सैनिकों, प्रधानमंत्री व संसद के प्रति हुए आक्रामक दुर्व्यवहारों से काफी दुखी होकर, भविष्य में अब कभी ऐसा अलोकतांत्रिक कुकृत्य न हो, इसके लिए तीन पृष्ठों का अपना एक सुझाव पत्र लिखकर अपने यशस्वी प्रधानमंत्री राजर्षि मोदी जी को भेजा है।
इसमें इन्होंने मोदी जी को राजर्षि शब्द से संबोधित करते हुए सुझाव दिया है कि संसद की सुरक्षा को देखते हुए अब धरना प्रदर्शन का स्थान जंतर-मंतर से बदलकर, कहीं बाहरी दिल्ली में ही सीमित समय के लिए अनुमति दी जाये। तथा अलोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर भीड़ जुटाकर, तख्तापलट की कुचेष्टा करने वालों व इन्हें उकसाने वालों की भी नागरिकता समाप्त कर दी जाये। चाहे वह जनप्रतिनिधि ही क्यों न हो।
भारत के बहुसंख्यक हिंदुओं को तोड़ने के लिए विदेशी ताकतें भी अपने एजेंटों द्वारा भारत में जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद आदि के नाम पर भड़काते रहती हैं। अतः हिंदुओं की काफी कमजोर होती जा रही एकता को पुनः और अधिक मजबूत करने के लिए एकमात्र अमोघ उपाय –“अंतरजातीय विवाहों” को प्रचुर सरकारी प्रोत्साहन दिया जाये।
पंडित आर्य गिरि ने बताया कि जंतर-मंतर पर तथाकथित छात्र-प्रदर्शन के नाम पर विदेश संचालित काकरोचों के असभ्य अश्लील आक्रामक हुड़दंगों से मैं इतना दुखी व्याकुल हो गया था कि दो-दिन तक खाना नहीं खाया। जिससे मेरा रक्तचाप गिरकर 95/60 होगया था। वर्ना यह पत्र मैं और पहले ही लिख भेजता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *