
कोलकाता। 8 जून 2026। राष्ट्रीय कवि संगम (मध्य कोलकाता इकाई, पश्चिम बंगाल) के तत्वावधान में विश्व पर्यावरण सप्ताह तथा ओज के शीर्ष हस्ताक्षर डॉ. हरिओम पवार जी की 75वीं वर्षगांठ (अमृत महोत्सव) के पावन अवसर पर एक भव्य काव्य गोष्ठी का गरिमामयी आयोजन रविवार, 7 जून 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक बड़ा बाजार लाइब्रेरी आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री सभागार में किया गया।कार्यक्रम का प्रारम्भ स्वागता बसु की सरस्वती वंदना से हुई।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र चेतना और साहित्यिक मूल्यों पर गहन मंथन हुआ और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रांतीय अध्यक्ष डॉ गिरिधर राय के सानिध्य एवं डॉ प्रेमचंद त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि: श्री बी. के. त्रिपाठी (सी.वी.ओ., कोल इंडिया) और विशिष्ट अतिथि: श्री सुनील साहिल एवं श्री लक्ष्मी कुमार शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
डॉ० रेशमी पांडा मुकर्जी ने अपने वक्तव्य में पर्यावरण के संरक्षण के लिए जनता में जागरूकता बढ़ाने में कवियों की विशेष भूमिका का महत्व बताया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉक्टर प्रेम शंकर त्रिपाठी ने पर्यावरण के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ अरुण प्रकाश अवस्थी की पर्यावरण पर लिखी हुई कविता का वाचन किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एवं काव्य पाठ
अमृत महोत्सव (डॉ. हरिओम पवार जी को नमन)। राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ हरिओम पंवार के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में विकास ठाकुर ने डॉ हरिओम पंवार के कविता की आवृति की साथ ही उपस्थित अतिथियों एवं रचनाकारों का स्वागत भी किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन किया गया।
इसके उपरांत राष्ट्रीय कवि संगम, मालवा प्रान्त द्वारा भोपाल के युवा रचनाकार कवि नितेश व्यास जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। दिवंगत आत्मा की शांति के लिए उपस्थित सभी सदस्यों ने एक मिनट का मौन रखकर उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इसके उपरांत, ओजस्वी कविता के संवाहक डॉ. हरिओम पवार जी के 75वें वर्ष में प्रवेश करने पर उनके दीर्घायु जीवन की कामना की गई और उनके साहित्यिक अवदान को रेखांकित किया गया।
मुख्य अतिथि श्री बीके त्रिपाठी ने अपने काव्यात्मक संदेश में कहा “प्रकृति को अब हम ना छेड़े ना जियों का संघार करें, अपने जीवन शैली पर आओ हम पुनर्विचार करें” अन्य वक्ताओं ने भी अपनी कविताओं और वक्तव्यों के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण के प्रति मानवीय कर्तव्यों को जागृत करने का सशक्त संदेश दिया।
स्थानीय एवं प्रांतीय कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कीं। शृंगार, करुणा, पर्यावरण चेतना और राष्ट्रवाद से ओतप्रोत कविताओं ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं को बांधे रखा। इनमें प्रमुख थे-उषा जैन, मानस कुमार, श्रद्धा टिबरेवाल, सीमा शर्मा, डॉ.सुशीला ओझा, डॉ.शिप्रा मिश्रा, कृष्ण कुमार दुबे, दया शंकर मिश्र, जीवन सिंह, गणेश नाथ तिवारी, कमल पुरोहित ‘अपरिचित’, रंजना झा, अश्विनी झा, सूर्य बसु, नन्दलाल रौशन, राजन शर्मा, देवेश मिश्र,निधि कुमारी सिंह, सुरेंद्र सिंह।श्रोताओं में सुरेश अग्रवाल, लक्ष्मी जायसवाल, श्रीमोहन तिवारी, दीप चंद्र सोनकर आदि ने रचनाकारों का अंतर उत्साहवर्धन करते रहे।
रामा कांत सिन्हा ‘सुजीत’ के सुन्दर सञ्चालन ने सबको एकसूत्र में बांधकर रखा। मानस कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।
