
अजीत सेन भवन में गूंजी तालियों की गड़गड़ाहट
कोलकाता के सांस्कृतिक आकाश में विगत शाम शब्द और साधना का एक अनूठा महाकुंभ अवतरित हुआ, जिसने महानगर के साहित्यिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। हिन्दी साहित्य परिषद के तत्वावधान में अजीत सेन भवन में आयोजित ‘विराट कवि सम्मेलन सह सम्मान समारोह’ का शुभारंभ श्री विजय इस्सर की ओजस्वी गणेश वंदना और श्रीमती मंजू बेज की सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात उपस्थित मनीषियों ने माँ वीणापाणि के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर इस भव्य शब्द-यज्ञ का विधिवत शंखनाद किया।
परिषद के चेयरमैन श्री तारकनाथ दूबे और राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय शुक्ला के नेतृत्व में सजे इस मंच को मुख्य अतिथि, कोल इंडिया के मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री बृजेश त्रिपाठी ने संबोधित करते हुए साहित्य को समाज का मार्गदर्शक बताया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात रचनाकार श्री रवैल पुष्प और प्रबुद्ध साहित्यकार श्री गिरधर राय की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनका परिषद द्वारा भावभीना अभिनंदन किया गया। इस भव्य शाम का अत्यंत कुशल और उम्दा संचालन आदित्य त्रिपाठी और प्रदीप कुमार धानुक ने किया।
औपचारिकताओं के उपरांत मंच से जब काव्य की अविरल सरिता प्रवाहित हुई, तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। देश-विदेश से पधारे मूर्धन्य कवियों ने श्रृंगार की कोमलता, वीर रस के ओज, हास्य-व्यंग्य के तीखे बाणों और समसामयिक विसंगतियों पर बुने अपने छंदों से देर रात तक समां बांधे रखा। पूरा सभागार हर कविता पर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। अंत में, परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय शुक्ला ने महानगर के सुधी श्रोताओं और आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया। हिन्दी साहित्य परिषद का यह भगीरथ प्रयास कोलकाता के साहित्यिक परिदृश्य पर एक अमिट कीर्तिमान के रूप में स्थापित हो गया।
