आत्मा का मिलन गृहस्थ जीवन है , गृहस्थ जीवन की पूंजी संतान है : पण्डित विजय शंकर मेहता

कोलकाता। अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालु भक्तों ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक पुण्य अर्जित किया । सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित विजय शंकर मेहता ने सरल आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा शक्ति का संचय स्वस्थ शरीर, शुद्ध मन और मर्यादित वाणी से होता है । आत्मा का मिलन गृहस्थ जीवन है । गृहस्थ जीवन की पूंजी संतान है । सुखी गृहस्थ आश्रम के लिये श्रीमद् देवी भागवत कथा श्रवण करने की प्रेरणा देते हुए कहा आप अपने लिये मत मुस्कुराइये, बच्चों के सुखी जीवन के लिये समर्पित रूप से अभिभावक का नैतिक कर्तव्य पालन करें । ना आँखों से आंसू यूँ झलकाइये… मुस्कुराइये भजन की प्रस्तुति के साथ पण्डित मेहता ने कहा भरत की मां कैकेई के कारण श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास हुआ । हमारे आस-पास शकुनी और मंथरा मंडरा रहे हैं, जो घर तोड़ते हैं । पण्डित मेहता ने भगवान श्रीकृष्ण एवं पाण्डव के देवलोकगमन की कथा सुना कर भाव विभोर किया । उन्होंने कहा आत्मबोध होने पर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है । कथा में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की । सम्पूर्ण परिसर में देवी भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला । अर्बनेश्वर देवालय ट्रस्ट के ट्रस्टी के के सिंघानिया ने श्रद्धालु भक्तों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

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