सकल जैन समाज की ओर से आर्यिका व साध्वियों एवं जैन संतों की सुरक्षा हेतु कोलकाता में निकाली गई विशाल मौन रैली

संस्था की ओर से अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

कोलकाता 30 मई 2026: एकता, अनुशासन एवं सामूहिक संवेदना का अभूतपूर्व परिचय देते हुए कोलकाता में ‘सकल जैन समाज के बैनर तले शनिवार 30 मई को हजारों जैन श्रद्धालुओं ने महानगर की सड़कों पर एक विशाल मौन रैली निकाली। इस मौन रैली का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश के रीवा में हुई दुखद सड़क दुर्घटना में देवलोक गमन हुईं पूज्य जैन आर्यिका द्वय से पीड़ित जैन समाज को न्याय दिलाना और देशभर में पदविहार करने वाले जैन संतों व साध्वियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग करना था।

इस मौन रैली के उपरांत सकल जैन समाज का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा, जहां पश्चिम बंगाल के माननीय राज्यपाल महामहिम श्री आर.एन. रवि के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इस प्रमुख प्रतिनिधिमंडल में विनोद कुमार काला, संदीप पाटनी, अजीत सेठी, अजय भंसाली एवं बुधमलजी लूनिया शामिल थे।

यह ऐतिहासिक मौन रैली बड़ा मंदिर से प्रारम्भ होकर सत्यनारायण पार्क, एम.जी. रोड, ब्रेबर्न रोड, बेंटिक स्ट्रीट एवं एस्प्लेनेड मार्ग से गुजरते हुए अत्यंत अनुशासित ढंग से आगे बढ़ते हुए धर्मतल्ला पर जाकर एक सभा में परिवर्तित हो गई। रैली में बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा एवं वरिष्ठ नागरिक हाथों में तख्तियां और बैनर लिए शांतिपूर्ण तरीके से सम्मिलित हुए।

प्रतिनिधिमंडल ने रीवा की हृदयविदारक घटना से उत्पन्न देशव्यापी पीड़ा एवं जैन समाज की गहरी चिंताओं से ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया तथा संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा हेतु तत्काल प्रभावी कदम उठाने का पुरजोर अनुरोध किया।

ज्ञापन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जैन संत एवं साध्वियां पूर्णतः अहिंसक, निःशस्त्र एवं त्यागमयी जीवन जीने वाले तपस्वी होते हैं, जो आजीवन केवल पैदल विहार करते हैं। अतः उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन का नैतिक, संवैधानिक एवं मानवीय दायित्व है।

सौंपे गए ज्ञापन में यह निम्न मुख्य मांगें रखी गईं:

1: उच्चस्तरीय जांच (एसआईटी): रीवा घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच हेतु विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा न्यायिक जांच आयोग का तत्काल गठन किया जाए।

2: साक्ष्यों की सुरक्षा: घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर उनकी निष्पक्ष जांच हो।

3: दोषियों पर त्वरित कार्रवाई: इस दुखद दुर्घटना के जिम्मेदारों और दोषियों के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

4: संत सुरक्षा प्रोटोकॉल: देश भर में विहाररत संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा हेतु एक व्यापक “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” तत्काल लागू किया जाए।

4: राष्ट्रीय नीति का निर्माण: भारत सरकार द्वारा “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाई जाए।

5: सुरक्षित कॉरिडोर: संतों एवं पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग, विशेष सुरक्षा क्षेत्र तथा संरक्षित पैदल पथ विकसित किए जाएं।

6: आपातकालीन समन्वय तंत्र: संतों की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में सहायता हेतु प्रशासनिक समन्वय तंत्र एवं हेल्पलाइन व्यवस्था स्थापित की जाए।

7: संवेदनशील श्रेणी: संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों/दुर्घटनाओं को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखकर उनके मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय, उत्तरदायित्व एवं संतों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक पहल है। इसका एकमात्र उद्देश्य भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना है।

इस महत्वपूर्ण ज्ञापन का मसौदा सकल जैन समाज की ओर से जैन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद कुमार काला, जीतो कोलकाता चैप्टर के अध्यक्ष धर्मेन्द्र जैन तथा जैन समाज के युवा नेता जितेन्द्र काला द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें संतों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न संवैधानिक, मानवीय एवं प्रशासनिक पहलुओं को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया।

हजारों श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बावजूद पूरा जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस सम्पूर्ण मौन रैली की व्यवस्था, मार्ग-व्यवस्था और सुचारु संचालन की जिम्मेदारी जैन समाज की अग्रणी स्वयंसेवी संस्था “पुष्पांजलि” के समर्पित कार्यकर्ताओं ने अत्यंत दक्षता के साथ निभाई। जिसके लिए सकल जैन समाज ने संस्था एवं उसके सभी कार्यकर्ताओं के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।

मौन रैली का समापन दिवंगत आर्यिकाओ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने तथा न्याय एवं संत सुरक्षा की इस मुहिम को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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