
कोलकाता, 18 मई । पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचारमुक्त और पारदर्शी प्रशासन देने की दिशा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने सोमवार को बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया। राज्य सरकार ने कई पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) अधिकारियों को मंत्रियों के “कार्यकारी सहायक” के रूप में नियुक्त किया है।
राज्य के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में अधिकारियों को तत्काल नई जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों का चयन उनकी साफ-सुथरी छवि, पारदर्शी कार्यशैली और राजनीतिक रूप से निष्पक्ष सेवा रिकॉर्ड के आधार पर किया गया है।
2013 बैच के डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी विश्वनाथ चौधरी को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष का कार्यकारी सहायक नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वह हुगली जिला परिषद में उप सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
वहीं, 2016 बैच के अधिकारी कृष्ण चंद्र मुंडा को पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री खुदीराम टुडू का कार्यकारी सहायक बनाया गया है। वह अभी बांकुड़ा जिले में उप मजिस्ट्रेट-सह-उप समाहर्ता के रूप में तैनात हैं।
इसके अलावा 2016 बैच के ही अधिकारी कौशिक कुमार मैती को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता मंत्री अशोक कीर्तनिया का कार्यकारी सहायक नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वह दक्षिण 24 परगना के जिला योजना अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियुक्ति से पहले संबंधित अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा की गई। चयन प्रक्रिया में ईमानदार, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रशासनिक छवि वाले अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई।
स्वतंत्रता के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य की प्रशासनिक संरचना में व्यापक बदलाव शुरू हो गए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य सचिवालय में बड़े स्तर पर फेरबदल शुरू कर चुके हैं। पिछले कुछ सप्ताह में कई तबादले और प्रशासनिक पुनर्गठन किए गए हैं।
नई सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में सेवा विस्तार पर कार्यरत 60 वर्ष से अधिक आयु के 243 अधिकारियों की विस्तारित नियुक्तियां भी समाप्त कर दी हैं। इसके अतिरिक्त हाल ही में दो आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई है।
