
कोलकाता। अन्तर्राष्ट्रीय संस्था रचनाकार भारत फाउंडेशन के संस्थापक,वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेश चौधरी जी के अमृत महोत्सव तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शारदा चौधरी जी के 70वें जन्मोत्सव का समारोह अत्यंत भव्य, दिव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर महानगर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की स्नेहिल उपस्थिति और पूज्य संत श्रीकांत शर्मा जी के आगमन एवं आशीर्वचनों ने पूरे आयोजन की शोभा में चार चाँद लगा दिए।
‘रचनाकार’ परिवार के सदस्यों ने सुरेश चौधरी जी की रचनाओं को एक नये अंदाज़ में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ गीतकार आलोक चौधरी ने सुरेश चौधरी जी द्वारा रचित भगवती वंदना के गायन से किया।
चित्तौड़गढ़ के वीरों पर रचित महाकाव्य को रजनी मूंधड़ा ,प्रणति ठाकुर, भारती मिश्रा, चांदनी झा, मीतू कनोडिया,पूर्णिमा जायसवाल ,सविता भुवानिया ने प्रस्तुत किया, चंदा प्रहलादका ने सूत्रधार की भूमिका अदा की।
विभिन्न संबंधों पर लिखी सुरेश जी की रचनाओं का “कविता कोलाज” वरिष्ठ कवयित्री विद्या भण्डारी जी,मीतू कनोडिया ,सविता भुवानिया, कविता कोठारी ,पूर्णिमा जायसवाल, राधा गुप्ता, मंजू श्री गुप्ता, ऊषा पांडे शुभांगी, अंजू मनोज और शशि लाहोटी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसमें मौसमी प्रसाद और सुरेंद्र सिंह ने सूत्रधार की भूमिका निभाई।
सुरेश चौधरी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर देश-विदेश के साहित्यकारों द्वारा लिखित उद्गारों पर आधारित रचना सरन के संपादन में प्रकाशित पुस्तक “शब्द साधना और संस्कृति के युग पुरुष- सुरेश चौधरी ‘इंदु “का लोकार्पण विशेष टिप्पणी के साथ संस्था के साहित्य मंत्री, वरिष्ठ पत्रकार श्री रावेल पुष्प जी ने करवाया। रचना सरन के संचालन में रचनाकार परिवार ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।
आशीष चौधरी द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से तैयार सुरेश जी की जीवन-यात्रा पर आधारित वृतचित्र अद्भुत, भावपूर्ण और अत्यंत प्रभावशाली रहा। इस मौके पर नगर के साहित्यकारों तथा विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही मसलन- ताजा टीवी के निदेशक विश्वंभर नेवर, प्रमोद शाह नफ़ीस, शंभूनाथ,सोमा बंदोपाध्याय,गिरधर राय, नंदलाल रूंगटा,धनपत अग्रवाल,रंजीत अग्रवाल, विष्णु तुलस्यान,हरेराम अग्रवाल,किशन किल्ला तथा अन्य। बाल कलाकार शरण्या और स्वरातिका के मनमोहक नृत्य और शारदा जी ने पियानो वादन से सबका दिल जीत लिया।
कार्यक्रम स्थल पर सुरेश चौधरी जी की साहित्य, संस्कृति, आध्यात्म जैसे विषयों पर लगभग तीस पुस्तकें प्रदर्शित थीं, जहां से उपस्थित विशिष्ट अतिथि अपनी पसंद की पुस्तकें उपहार स्वरूप प्राप्त कर सकते थे। इसके अलावा बचपन की यादें, रंग-बिरंगी चूड़ियों के स्टाल से भी मनपसंद उपहार प्राप्त किये जा सकते थे।
कार्यक्रम पूरी गरिमा, मनोरंजन, आत्मीयता और उत्साह से परिपूर्ण रहा जिसकी स्मृतियों को संजो कर रखा जा सकता है।
