दलितों के मसीहा थे- शम्भुनाथ राय


कोलकाता, 15 अप्रैल। कोलकाता महानगर की सामाजिक व साहित्यिक संस्था ‘शब्दकार ‘ के तत्वावधान में भारतीय संविधान के निर्माता डाॅ भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता शम्भुनाथ राय ने कहा कि डाॅ अम्बेडकर की सबसे महत्वपूर्ण देन यह है कि उन्होंने समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गो को आत्मसम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उनका प्रसिद्ध नारा ‘शिक्षित बनो, संगठित हो,संघर्ष करो ‘आज भी सामाजिक परिवर्तन का मूल-मंत्र है। उक्त बातें भारतीय भाषा परिषद के सामने सम्मेलन हाॅल में कही। मुख्य अतिथि विश्वंभर नेवर ने कहा कि डाॅ अम्बेडकर देश को सामाजिक समरसता का मंत्र ही नहीं दिया बल्कि राष्ट्र सर्वोच्च है, यह दृष्टि भी दी। वह भारतीय संस्कृति में रचे-बसे मूल्यों से जुड़े महामना थे। विशिष्ट अतिथि मिली दास ने कहा कि डाॅ साहब ने अपना पूरा जीवन वंचित वर्ग के कल्याण को समर्पित किया था। प्रधान अतिथि सत्य प्रकाश दुबे ने कहा कि अंबेडकर के विचार वास्तविक रूप में उस राष्ट्रवाद से ही जुड़े है जिनमें व्यक्ति और व्यक्तियों के बीच जातियों, वर्गो वर्णो धर्मों में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं है। प्रधान वक्ता शिव शंकर सिंह ‘सुमित ‘ ने कहा आज भारत सामाजिक और आर्थिक विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, डाॅ अम्बेडकर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो उठते हैं। इस अवसर पर अम्बेडकर पर लिखी कविताएँ सुनायीं जिनमें राम पुकार सिंह ‘पुकार गाजीपुरी, विजय शर्मा ‘विद्रोही, नीतु शर्मा, मुजतर इफ्तिखारी, जतिब हयाल, कमला पति पाण्डेय ‘निडर ‘,फौजिया अख्तर ‘रीदा ‘,एजाज वारसी, रामनारायण झा ‘देहाती ‘,सुरेन्द्र सिंह, रणजीत भारती, मोहम्मद अय्यूब वारसी ‘कोलकतवी ‘,धर्म दुबे, रवि पारख, डाॅ अहमद मिराज, अशरफ याकुबी, डाॅ शाहिद फरोगी, पूर्णिमा जायसवाल, विद्या प्रसाद साथी ने सुनाकर खूब वाहवाही बटोरीं। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन प्रदीप कुमार धानुक व धन्यवाद ज्ञापन ओमप्रकाश चौबे ने दिया।

 

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