
रानीगंज। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच रानीगंज क्षेत्र में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम ने सियासी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। रानीगंज विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी पार्थ घोष की पूर्व पत्नी पिंकी सिन्हा ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है और इसे चुनावी समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। रानीगंज के अमृत कुंज आश्रम के समीप आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कालो बरण मंडल ने पिंकी सिन्हा को पार्टी का झंडा थामकर उनका औपचारिक स्वागत किया। इस अवसर पर बर्धमान-दुर्गापुर के सांसद कीर्ति आजाद, तृणमूल युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पार्थ देवासी, जिला महासचिव रूपेश यादव, टाउन कमेटी के अध्यक्ष ज्योति सिंह उपाध्यक्ष बापी चक्रवर्ती सहित कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।सभा के दौरान मंच से अपने विचार व्यक्त करते हुए पिंकी सिन्हा भावुक हो गईं। उन्होंने अपने निजी जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे नहीं चाहतीं कि किसी अन्य महिला को उनके जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य की महिलाएं स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। सूत्रों के अनुसार, पिंकी सिन्हा और पार्थ घोष का विवाह वर्ष 2004 में हुआ था, जबकि वर्ष 2007 में दोनों के बीच तलाक हो गया। इस मुद्दे को उठाते हुए तृणमूल प्रत्याशी कालो बरण मंडल ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा भले ही महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन उनके ही उम्मीदवार का अतीत कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पिंकी सिन्हा के साथ कथित उत्पीड़न की घटनाओं का भी उल्लेख किया। वहीं, इस सभा में उपस्थित बर्धमान-दुर्गापुर के सांसद कीर्ति आजाद ने भाजपा के खिलाफ कड़े शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल झूठे वादों और खोखले नारों की राजनीति करती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार निश्चित है और राज्य की जनता एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में अपना समर्थन देगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद रानीगंज की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव से पहले इस तरह के घटनाक्रमों ने न केवल राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को बढ़ा दिया है, बल्कि क्षेत्र का चुनावी माहौल भी काफी गरमा गया है। अब देखना यह होगा कि इस सियासी बदलाव का आगामी चुनाव परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ता है।
