
रानीगंज। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र रानीगंज में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच 93 नंबर वार्ड अंतर्गत अन्नपूर्णा लेन इलाके में दीवार लेखन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के समर्थन में किए गए प्रचार को कथित रूप से तिरपाल से ढकने के आरोप के बाद टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ गई हैं। टीएमसी के एससी-एसटी सेल के वार्ड अध्यक्ष मितुल केवड़ा ने आरोप लगाया कि एक निर्माणाधीन भवन की दीवार पर पार्टी प्रत्याशी कालोबरन मंडल के समर्थन में दीवार लेखन किया गया था, जिसे जानबूझकर ढक दिया गया। उनका कहना है कि उक्त भवन का निर्माण कार्य अभी पूर्ण रूप से स्वीकृत नहीं है, इसके बावजूद केवल टीएमसी के प्रचार को ही छिपाया गया, जबकि भाजपा का दीवार लेखन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
मितुल केवड़ा ने इस पूरे प्रकरण के पीछे भाजपा की साजिश होने का आरोप लगाते हुए कहा कि टीएमसी कार्यकर्ता इस तरह की हरकत को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो इसके विरोध में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। वहीं, इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा युवा मोर्चा मंडल एक के अध्यक्ष मोनू वर्मा ने कहा कि भाजपा इस प्रकार की राजनीति में विश्वास नहीं रखती। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में कहीं भी विपक्ष के प्रचार-प्रसार में बाधा नहीं डाली जाती और पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती है। मोनू वर्मा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में यह राजनीतिक संस्कृति नई नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले वामपंथी शासनकाल में और अब टीएमसी के कार्यकाल में विपक्षी दलों को प्रचार से वंचित करने की घटनाएं सामने आती रही हैं। भाजपा इस राजनीतिक परंपरा को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी दावा किया कि टीएमसी के दीवार लेखन को ढकने की घटना संभवतः पार्टी के अंदरूनी मतभेदों का परिणाम हो सकती है और इसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल इस मामले को लेकर इलाके में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चुनाव नजदीक आते ही इस तरह के विवादों के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे क्षेत्र का चुनावी माहौल और अधिक गर्माता नजर आ रहा है।
