चुनावी तपिश के बीच फूटा ग्रामीणों का आक्रोश: ‘समाधान’ के 10 लाख रुपये पर उठे सवाल

रानीगंज। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच जनप्रतिनिधियों को अब सीधे जनता के तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में उस समय एक अलग ही स्थिति देखने को मिली, जब भाजपा प्रत्याशी पार्थो घोष अंडाल ब्लॉक के धंदाडीह गांव में डोर-टू-डोर जनसंपर्क अभियान के तहत पहुंचे। जनसंपर्क के दौरान विकास के दावों के बीच एक स्थानीय ग्रामीण ने उन्हें रोककर अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की। ग्रामीण ने राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘सीधे समाधान’ अथवा बूथ स्तर पर विकास के लिए प्रति बूथ 10-10 लाख रुपये की राशि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर यह पैसा कहां खर्च हुआ। ग्रामीण ने गांव की बदहाल स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि गांव के बीच से गुजरने वाली नाली के स्लैब लंबे समय से टूटे पड़े हैं। नाली का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे आम लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब ग्रामीण के अनुसार, वहां मौजूद तृणमूल कांग्रेस के कुछ समर्थकों ने उसे बोलने से रोकने और चुप कराने का प्रयास किया। इस घटना को लेकर पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद भाजपा प्रत्याशी पार्थो घोष ने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “आज एक साधारण ग्रामीण अपनी जायज समस्या रख रहा था, लेकिन तृणमूल के कार्यकर्ताओं ने उसे डराने और चुप कराने की कोशिश की। यह उनकी हताशा और विफलता को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि केवल धंदाडीह ही नहीं, बल्कि पूरे रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में यही स्थिति बनी हुई है। सरकारी योजनाओं के नाम पर फंड का दुरुपयोग हो रहा है, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। पार्थो घोष ने आश्वासन दिया कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो भ्रष्टाचार पर सख्त लगाम लगाई जाएगी और क्षेत्र की सभी जर्जर समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। चुनावी माहौल के बीच इस तरह की घटनाएं यह स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि इस बार जनता केवल वादों से संतुष्ट नहीं है, बल्कि विकास कार्यों का ठोस हिसाब मांग रही

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