कोलकाता, 4 अप्रैल । चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विभिन्न स्तर के नेताओं को दी जा रही भारी पुलिस सुरक्षा पर गंभीर आपत्ति जताई है। आयोग ने इस मामले में पक्षपातपूर्ण रवैये की आशंका भी व्यक्त की है।
आयोग के सूत्रों के अनुसार, चुनाव की घोषणा से पहले राज्य सरकार ने 832 तृणमूल कांग्रेस नेताओं तथा 144 अन्य व्यक्तियों, जिनमें सत्तारूढ़ दल के समर्थक भी शामिल हैं, की सुरक्षा के लिए कुल दो हजाल 185 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था।
चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता को निर्देश दिया है कि वे दो से तीन दिनों के भीतर निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि टीएमसी नेताओं को मिली सुरक्षा चुनाव आयोग की सहमति के बगैर जारी है।
इससे पहले आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस से उन राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा हटाने के अपने आदेश के पालन पर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी थी, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। आयोग ने स्पष्ट किया था कि यह कार्रवाई राजनीतिक दल से परे जाकर समान रूप से की जानी चाहिए।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया था कि जिन नेताओं को नियमों के विरुद्ध सरकारी सुरक्षा दी गई है या जो जमानत या पैरोल पर बाहर हैं अथवा जिनका आपराधिक इतिहास है, उनकी सुरक्षा भी वापस ली जाए।
इसके अलावा जिन नेताओं के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं, उनके मामलों में भी आयोग ने उचित समय के भीतर वारंट लागू करने का निर्देश दिया है। हालांकि बंगाल पुलिस की ओर से अभी तक इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं की गई है, जिसे लेकर आयोग खफा है।
