पानागढ़ में राम नवमी पर भव्य शोभायात्रा, 50 हजार श्रद्धालुओं की सहभागिता का दावा

दुर्गापुर। कांकसा के पानागढ़ बाजार में राम नवमी के पावन अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी एक भव्य, आकर्षक और विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। पानागढ़ बाजार राम नवमी सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में आयोजकों द्वारा लगभग 50 हजार लोगों की भागीदारी का दावा किया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला। शोभायात्रा की शुरुआत रणडिहा मोड़ से की गई, जहां से श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ आगे बढ़े। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, कांकसा और आसपास के विभिन्न इलाकों से निकलने वाली छोटी-छोटी शोभायात्राएं इसमें शामिल होती चली गईं, जिससे यह एक विराट जनसैलाब में परिवर्तित हो गई। यह शोभायात्रा दार्जिलिंग मोड़ से होते हुए पुनः रणडिहा मोड़ पर पहुंचकर संपन्न हुई। इस अवसर पर बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद कीर्ति आजाद झा विशेष रूप से उपस्थित रहे और श्रद्धालुओं के साथ शोभायात्रा में भाग लिया। वहीं गलसी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राजू पात्रा भी इस आयोजन में शामिल होकर लोगों का अभिवादन करते नजर आए। इस शोभायात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सामाजिक समरसता रही।आयोजन में न केवल हिंदू समुदाय, बल्कि सिख और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभिन्न धर्मों के लोगों की सक्रिय सहभागिता ने पानागढ़ की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की परंपरा को एक बार फिर मजबूती प्रदान की। आयोजकों ने बताया कि हर वर्ष इस शोभायात्रा में भाग लेने वालों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है और बहु-धार्मिक भागीदारी ही इस आयोजन की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है। किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कांकसा थाना पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान पूरे क्षेत्र में मुस्तैदी से तैनात रहे और शोभायात्रा पर लगातार निगरानी रखी गई।उल्लेखनीय है कि राम नवमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ तथा भव्य शोभायात्राओं का आयोजन किया जाता है, जिससे धार्मिक वातावरण और भी भक्तिमय हो उठता है।

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