कोकिल कंठ की धनी नन्ही कुमकुम: दादा के अधूरे सपनों को साकार करने की राह पर बढ़ती दुर्गापुर की उभरती गायिका

दुर्गापुर। (सत्यनारायण सिंह) पश्चिम बर्धमान जिला के दुर्गापुर की नन्ही प्रतिभा कुमकुम चौधरी अपनी मधुर आवाज और संगीत के प्रति लगन के बल पर कम उम्र में ही पहचान बना रही हैं। कक्षा दो की छात्रा (आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा तीन में प्रवेश) कुमकुम के कंठ में कोयल जैसी मिठास है, जो सुनने वालों को सहज ही आकर्षित कर लेती है। कुमकुम एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में अध्ययनरत हैं और पढ़ाई के साथ-साथ संगीत में भी गहरी रुचि रखती हैं। उनकी इस प्रतिभा पर पूरा चौधरी परिवार गर्व महसूस कर रहा है। कुमकुम के दादा, वारिया माया बाजार क्षेत्र के प्रख्यात समाजसेवी रामाशीष चौधरी ने एक साक्षात्कार में बताया कि उनके परिवार में संगीत की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कहा, “हमारे रग-रग में संगीत बसता है। परिस्थितियों के कारण मैं स्वयं संगीत के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन अब मेरी पोती कुमकुम उस अधूरे सपने को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है।”
उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें विभिन्न वाद्य यंत्रों का ज्ञान है, परंतु नियमित अभ्यास के अभाव में वह इस क्षेत्र में सक्रिय नहीं रह सके। अब वे अपनी पोती में वही प्रतिभा और जुनून देख रहे हैं, जो भविष्य में उसे एक सफल कलाकार बना सकता है। कुमकुम के पिता तालीम चौधरी, जो पेशे से व्यवसायी हैं, ने बताया कि उन्होंने भी अपने बचपन में अपने पिता से संगीत की शिक्षा ली थी और कई वाद्य यंत्र बजाना सीखा था। हालांकि, जीवन की व्यस्तताओं के कारण उन्हें संगीत को बीच में छोड़ना पड़ा, लेकिन आज भी उनका लगाव बना हुआ है। वे स्वयं कुमकुम के नियमित रियाज़ में सहयोग करते हैं। माता रश्मि चौधरी ने अपनी बेटी की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि वे मां सरस्वती से प्रार्थना करती हैं कि कुमकुम अपने दादा के सपनों को साकार करे और संगीत के क्षेत्र में ऊंचाइयों तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि आगामी नवरात्रि को ध्यान में रखते हुए कुमकुम इन दिनों मां दुर्गा के भजनों के गायन का विशेष अभ्यास कर रही है। कम उम्र में ही कुमकुम ने अपनी प्रस्तुतियों से कई मंचों पर सराहना बटोरी है। वह बर्दवान के प्रसिद्ध कांचन मेला तथा दुर्गापुर उत्सव जैसे आयोजनों में भाग लेकर कई पुरस्कार जीत चुकी हैं।
नन्ही कुमकुम की प्रतिभा, परिवार का मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में वह संगीत जगत में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर सकती हैं। दुर्गापुर की यह उभरती हुई बाल प्रतिभा निश्चित ही भविष्य में शहर और अपने परिवार का नाम रोशन करेगी।

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