
कोलकाता, 10 मार्च। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और हिंसामुक्त कराए जाएंगे। उन्होंने मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि वे बिना किसी डर और दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल के अपने सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं देता हूं। राज्य में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और हिंसामुक्त होंगे। मतदाता बिना किसी भय या दबाव के मतदान कर सकेंगे।”
मुख्य चुनाव आयुक्त मंगलवार सुबह हावड़ा स्थित बेलूर मठ पहुंचे, जो स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय है। यहां दर्शन करने के बाद चुनाव आयोग का पूर्ण पीठ राज्य सरकार के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करने वाला है।
इस बैठक में राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडेय समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में चुनाव से संबंधित तैयारियों और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त पत्रकार वार्ता को भी संबोधित करेंगे। चुनाव आयोग का पूर्ण पीठ देर शाम दिल्ली लौट जाएगा।
इधर, मंगलवार को ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मामले पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। यह सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति निलय विपिनचंद्र अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष दोपहर तीन बजे से हो सकती है।
फिलहाल मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े दस्तावेजों की न्यायिक जांच की प्रक्रिया जारी है, जिसमें 732 न्यायिक अधिकारी लगे हुए हैं। इनमें पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से 100-100 अधिकारी भी शामिल हैं। चुनाव अधिकारी कार्यालय का अनुमान है कि मौजूदा गति से यह प्रक्रिया अप्रैल के पहले सप्ताह से पहले पूरी होना मुश्किल है।
इस बीच राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में कोलकाता के एस्प्लेनेड पूर्व में अपना अनिश्चितकालीन धरना जारी रखा है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी ने मुख्यमंत्री से उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए धरना समाप्त करने का अनुरोध किया है।
