आसनसोल गुरुनानक गुरुद्वारा चुनाव स्थगित, वोटर लिस्ट विवाद से सिख समाज में बढ़ी हलचल

आसनसोल। पश्चिम बर्धमान जिले के औद्योगिक शहर आसनसोल में गुरुनानक गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव को लेकर अचानक नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव से ठीक दो दिन पहले वोटर लिस्ट को लेकर उठे सवालों के बाद चुनाव प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया, जिससे सिख समाज के बीच चर्चा और हलचल तेज हो गई है। गुरुद्वारा प्रधान पद के उम्मीदवार गुरचरण सिंह भरारा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मौजूदा प्रधान अमरजीत सिंह भरारा तथा चुनाव प्रक्रिया पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि तैयार की गई वोटर लिस्ट में कई योग्य मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गुरचरण सिंह भरारा के अनुसार, विशेष रूप से आसनसोल के रेलपार क्षेत्र में रहने वाले सिख समाज के कई लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए हैं। उनका कहना है कि यदि इन लोगों को मतदान का अधिकार नहीं दिया गया, तो यह संगत के साथ अन्याय होगा। उन्होंने मांग की कि वोटर लिस्ट में आवश्यक संशोधन कर सभी पात्र लोगों को मतदान का अधिकार दिया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से गुरुद्वारे की आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा संगत के सामने सार्वजनिक करने की भी मांग की। गुरचरण सिंह भरारा ने यह भी दावा किया कि गुरुद्वारा के नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को लगातार दो बार प्रधान बनने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। वहीं इन आरोपों के जवाब में मौजूदा प्रधान अमरजीत सिंह भरारा ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव अधिकारी अनिल सिंह गंभीर लगातार गुरचरण सिंह भरारा से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी ओर से फोन का जवाब नहीं दिया गया।अमरजीत सिंह भरारा ने बताया कि वर्तमान वोटर लिस्ट उस समय की है जब कुलदीप सिंह गुरुद्वारा के प्रधान थे। इस सूची में केवल मृतक मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और जो लोग 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेते हैं, उनके नाम जोड़े जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का फर्जी नाम शामिल नहीं है। फिर भी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वे सूची की स्क्रूटनी कराने के लिए तैयार हैं, ताकि किसी भी प्रकार की शंका को दूर किया जा सके। गुरुद्वारा के वित्तीय मामलों पर उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले, यानी 31 मार्च से पहले, गुरुद्वारे की आय-व्यय का पूरा हिसाब संगत के सामने प्रस्तुत कर दिया जाएगा। लगातार दो बार प्रधान बनने पर रोक के आरोप को भी उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि गुरुद्वारा के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और उन्हें इस तरह के किसी नियम की जानकारी नहीं है। अमरजीत सिंह भरारा ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब गुरचरण सिंह भरारा ने चुनाव के लिए नामांकन पत्र लिया और उसे जमा भी किया, तब उन्होंने वोटर लिस्ट को लेकर कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई। उन्होंने कहा कि अब जब यह स्पष्ट हो रहा है कि संगत का समर्थन नहीं मिल रहा, तब इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने मीडिया के सामने यह भी घोषणा की कि जब भी गुरचरण सिंह भरारा चाहें, मतदाता सूची की जांच कराई जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव की नई तारीख, समय और अन्य प्रक्रिया भी उनकी सहमति से तय की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आसनसोल के निर्धारित मतदाताओं के अलावा अन्य बाहरी गुरुद्वारों के मतदाताओं को इस चुनाव में शामिल नहीं किया जाएगा।
फिलहाल चुनाव स्थगित होने के बाद इस पूरे मामले को लेकर सिख संगत के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वहीं स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि वोटर लिस्ट विवाद का समाधान कब तक होता है और गुरुनानक गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव की नई तारीख कब घोषित की जाती है।

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