
आसनसोल। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आसनसोल के रामकृष्ण मिशन आश्रम में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा उत्सव देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आयोजित विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा सैकड़ों पौधे रोपकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल, मंत्री डॉ. अजय कुमार पोद्दार, आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी, रामकृष्ण मिशन आश्रम के महाराज, पश्चिम बर्दवान के जिलाधिकारी एस. पन्नाबलम एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति सम्मान का अद्भुत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मां हमें जीवन देती है, उसी प्रकार पेड़ भी मानव जीवन के आधार हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
मंत्री डॉ. अजय कुमार पोद्दार ने रामकृष्ण मिशन आश्रम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित करने की अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति का छोटा प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान बन सकता है।

विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि रामकृष्ण मिशन आश्रम समाज सेवा के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि हरित वातावरण केवल सरकार की योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है। यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधे को वृक्ष बनाने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों, आश्रम के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। आश्रम परिसर में चारों ओर हरियाली का संदेश और प्रकृति के प्रति समर्पण का भाव दिखाई दिया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह अभियान न केवल पौधारोपण तक सीमित रहा, बल्कि लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने का सशक्त माध्यम भी बना। उपस्थित लोगों ने विश्वास जताया कि ऐसे सतत प्रयास आसनसोल को हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
