उद्योग, सेवा और संवेदना का सशक्त संगम—सुभाष अग्रवाला

आसनसोल। पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं प्रख्यात समाजसेवी सुभाष अग्रवाला ने एक भेंट-वार्ता के दौरान समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण के प्रति अपनी व्यापक प्रतिबद्धता को साझा किया। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, व्यापार, खेल, पर्यावरण और गौ-सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में उनके प्रयास निरंतर समाज को नई दिशा दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रतिदिन 7,500 से अधिक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। देशभर में संचालित 52 शिक्षा केंद्रों में 120 से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। इस पहल का लक्ष्य भविष्य में 1,00,000 बच्चों तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अब तक 500 से अधिक महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प, कृत्रिम आभूषण, मसाला निर्माण जैसी गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया गया है। आगामी चरण में यह संख्या 5,000 महिलाओं तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैंट) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सुभाष अग्रवाला ने 8.5 करोड़ व्यापारियों की आवाज़ को सशक्त किया है। 1,000 से अधिक परामर्श बैठकों के माध्यम से व्यापारिक अनुपालन को सरल बनाते हुए ईमानदार व्यापार को मजबूती दी गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिवर्ष 3,00,000 से अधिक रोगियों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें हर वर्ष 1,000 से अधिक नि:शुल्क नेत्र शल्य चिकित्सा, मातृत्व सेवाएँ और आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएँ शामिल हैं।
खेल क्षेत्र में 40 से अधिक खिलाड़ियों को सक्रिय सहयोग दिया जा रहा है, जिनमें 3 विश्व चैंपियन और 4 राष्ट्रीय चैंपियन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 100 से अधिक युवा मुक्केबाजों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देने वाली अकादमी हरियाणा में संचालित है। दुर्गापुर (आसनसोल) में पावर लिफ्टिंग प्रशिक्षण अकादमी स्थापित करने की भी योजना है, जहाँ 100 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत अब तक 50,000 से अधिक वृक्षारोपण किए जा चुके हैं। वहीं राजस्थान, अयोध्या एवं वृंदावन में 10,000 से अधिक गौवंश का संरक्षण कर गौ-सेवा की सनातन परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सुभाष अग्रवाला ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सेवा नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाकर सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देना है।

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