आसनसोल में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाया गया भाषा दिवस, मंत्री मलय घटक ने दी भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि

आसनसोल। आसनसोल सहित पूरे पश्चिम बंगाल और देशभर में भाषा दिवस श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक चेतना के साथ मनाया गया। इसी क्रम में आसनसोल में भी एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के कानून मंत्री एवं श्रम मंत्री मलय घटक विशेष रूप से उपस्थित रहे। आसनसोल के भाषामंच पर भाषा शहीद स्मृतिरक्षा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत भाषा आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनसमूह ने मौन रखकर शहीदों के बलिदान को स्मरण किया और मातृभाषा के सम्मान एवं संरक्षण का संकल्प लिया।इसके साथ कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भाषा आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और आत्मसम्मान का आधार है। भाषा शहीदों के त्याग और बलिदान को याद करते हुए वक्ताओं ने नई पीढ़ी को अपनी भाषा के प्रति गर्व और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का आह्वान किया। वही मंत्री मलय घटक ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा,कि “हमारा अभिमान और हमारी आशा है — हमारी प्यारी बंगला भाषा” इस अमर वाणी को हृदय में संजोते हुए उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को भाषा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं राष्ट्रीयतावादी अभिनंदन दिया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि मातृभाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। भाषा के संरक्षण और संवर्धन के बिना सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहने का आग्रह किया।समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया। गीत, कविता-पाठ और नृत्य के माध्यम से मातृभाषा के प्रति सम्मान और प्रेम को अभिव्यक्त किया गया। पूरे कार्यक्रम में भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता तथा एकता का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। वही कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने मातृभाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया। आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाषा दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का अवसर है.आसनसोल में आयोजित यह समारोह मातृभाषा के प्रति समर्पण, गौरव और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया है।

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